
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के योग विभाग एवं फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन के को-ऑर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव द्वारा लिखित पुस्तक “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षाविद एवं योग विशेषज्ञ उपस्थित रहे। पुस्तक का उद्देश्य योग के वैश्विक महत्व, उसके दार्शनिक आधार तथा मानव जीवन में उसकी उपयोगिता को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
योग की वैश्विक यात्रा और मानव कल्याण का संदेश
पुस्तक के लेखक डॉ. अमरजीत यादव ने बताया कि “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” विषय पर आधारित इस पुस्तक में कुल 10 अध्याय शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की यह अमूल्य धरोहर आज केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि संपूर्ण विश्व में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और असंतुलन के बीच योग व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का मार्ग प्रदान करता है। पुस्तक में योग के सैद्धांतिक पहलुओं के साथ-साथ उसके व्यावहारिक महत्व को भी विस्तार से समझाया गया है, ताकि पाठक दैनिक जीवन में योग की उपयोगिता को सहज रूप से समझ सकें।
21 जून को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
लेखक डॉ. अमरजीत यादव ने बताया कि पुस्तक में इस महत्वपूर्ण प्रश्न का भी विस्तृत उत्तर दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है। इसमें उल्लेख किया गया है कि 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है, जिसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों कारण निहित हैं। पुस्तक में इन तथ्यों की विस्तृत व्याख्या करते हुए योग और प्रकृति के गहरे संबंध को भी रेखांकित किया गया है।
योग दिवस कैसे बना वैश्विक जनआंदोलन
पुस्तक के एक महत्वपूर्ण अध्याय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की गौरवमयी यात्रा और उसके वैश्विक प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार 21 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस योग को एक वैश्विक जनआंदोलन का स्वरूप देने में सफल रहा है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि यह दिवस पूरी मानवता को एकजुटता, स्वास्थ्य, शांति और कल्याण का संदेश प्रदान करता है।