आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, उम्रकैद पर रोक से इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी आसाराम की सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और जेल प्रशासन को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में आसाराम मामले की सुनवाई से जुड़ी तस्वीर
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की सजा निलंबित करने से इनकार करते हुए राजस्थान सरकार से जवाब मांगा।

नई दिल्ली/अमर भारती। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु Asaram Bapu को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उनकी उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया, लेकिन राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

जमानत पर अभी फैसला नहीं

मामले की सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू शामिल थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जमानत देने का कोई आदेश नहीं दिया जा रहा है। पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद यह तय किया जाएगा कि जमानत देने की कोई असाधारण आवश्यकता है या नहीं। अदालत ने संकेत दिया कि केवल गंभीर स्वास्थ्य संकट या जीवन को खतरा होने जैसी परिस्थितियों में ही जमानत पर विचार किया जा सकता है।

जेल प्रशासन को चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि आसाराम को उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि वह 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं और कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी आधार पर उन्होंने राहत की मांग की थी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

इससे पहले Rajasthan High Court ने 27 मई को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। हालांकि अदालत ने उन्हें कुछ आरोपों से राहत भी दी थी। हाई कोर्ट ने गैंगरेप और पॉक्सो कानून की कुछ धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था। साथ ही आपराधिक साजिश से संबंधित आईपीसी की धारा 120-बी के आरोप भी हटाए गए थे।

किन धाराओं में बरकरार रही दोषसिद्धि?

हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आईपीसी की धारा 376(2)(F) के तहत आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई। अदालत ने गलत तरीके से बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न से संबंधित कई धाराओं के तहत भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके अलावा पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की संबंधित धाराओं में भी सजा को सही माना गया।

2018 में हुई थी सजा

गौरतलब है कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया था। अदालत ने आईपीसी, पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से आसाराम जेल में बंद हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य आधार पर राहत की मांग करते रहे हैं।

आगे क्या होगा?

अब सुप्रीम कोर्ट राजस्थान सरकार का जवाब मिलने के बाद मामले पर आगे सुनवाई करेगा। फिलहाल आसाराम की उम्रकैद की सजा प्रभावी बनी हुई है और उन्हें किसी प्रकार की नियमित जमानत नहीं मिली है। अदालत का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां कितनी गंभीर हैं और राज्य सरकार इस मामले में क्या पक्ष रखती है।

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