राम मंदिर भर्ती घोटाला? चढ़ावा चोरी जांच के बीच 125 नियुक्तियां भी जांच के दायरे में, कैसे चल रहा था नौकरी के नाम पर रिश्वत का खेल?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान अब 125 नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। पुलिस भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेज, बैंक लेनदेन और कथित रिश्वत के आरोपों की जांच कर रही है।

राम मंदिर भर्ती प्रक्रिया की जांच करती पुलिस
चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच अब राम मंदिर की नियुक्तियां भी जांच के घेरे में।

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चर्चित चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए खुलासों की ओर बढ़ रही है। अब इस मामले में सिर्फ दान राशि की कथित चोरी ही नहीं, बल्कि मंदिर प्रतिष्ठान में हुई नियुक्तियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि मंदिर में नौकरी दिलाने के नाम पर कुछ लोगों से कथित तौर पर धनराशि ली गई थी। इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस दस्तावेजों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों के बयानों की गहन जांच कर रही है।

हालांकि अब तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी के आरोप आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुए हैं। जांच एजेंसियां स्पष्ट कर चुकी हैं कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

अविनाश शुक्ला से पूछताछ के बाद बदली जांच की दिशा

सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के दौरान कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। जांच अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ में एक ट्रस्ट सदस्य का नाम कई बार सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी संभावित भूमिका की भी जांच शुरू कर दी। यही वह बिंदु था जहां से जांच का दायरा बढ़ाया गया और मंदिर में हुई नियुक्तियों की प्रक्रिया को भी जांच के घेरे में शामिल किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती पूरी तरह नियमानुसार हुई थी या कहीं वित्तीय अनियमितता और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया था।

125 नियुक्तियों पर जांच एजेंसियों की पैनी नजर

सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर प्रतिष्ठान में अब तक करीब 125 कर्मचारियों की नियुक्ति विभिन्न पदों पर की गई थी। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने नौकरी हासिल करने के लिए कथित रूप से पैसे दिए थे। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इन्हें सत्यापित करने में जुटी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो क्या यह कुछ चुनिंदा नियुक्तियों तक सीमित थी या फिर भर्ती प्रक्रिया के दौरान कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की हो रही पड़ताल

जांच के दौरान पुलिस ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र, सेवा अनुबंध, जॉइनिंग रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर कुछ कर्मचारियों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं मिले, जिसके बाद प्रत्येक नियुक्ति का अलग-अलग सत्यापन शुरू किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भर्ती किस प्रक्रिया के तहत हुई, चयन किस आधार पर किया गया, नियुक्ति की मंजूरी किस स्तर पर दी गई और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित क्यों नहीं मिले।

भर्ती को मंजूरी किसने दी, जांच का अहम सवाल

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन नियुक्तियों को अंतिम स्वीकृति किस अधिकारी या ट्रस्ट स्तर से मिली। सूत्रों के अनुसार, जिस ट्रस्ट सदस्य का नाम पूछताछ के दौरान सामने आया है, उससे भी जल्द पूछताछ की जा सकती है। हालांकि अभी तक किसी ट्रस्ट सदस्य या अधिकारी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। पुलिस केवल उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की होगी फोरेंसिक जांच

जांच एजेंसियां अब वित्तीय पहलू पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बैंक खातों और लेनदेन की जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि नियुक्तियों से पहले या बाद में किसी प्रकार का संदिग्ध धन हस्तांतरण हुआ था या नहीं। यदि किसी बैंक खाते में असामान्य लेनदेन, बड़ी नकद राशि या संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिलते हैं, तो उनकी अलग से जांच की जाएगी। इसके अलावा संबंधित ट्रस्ट सदस्य की संपत्तियों का भी आकलन किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उनकी संपत्ति में कोई असामान्य वृद्धि हुई या नहीं।

दो अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में

चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, अब भर्ती प्रक्रिया की जांच का भी हिस्सा बन गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन दोनों की नियुक्तियों को प्रभावित करने या भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने में कोई भूमिका थी। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह भी सत्यापित कर रही हैं कि क्या इन दोनों का किसी ट्रस्ट सदस्य से पारिवारिक या अन्य प्रकार का संबंध था और यदि था तो उसका भर्ती प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध बनता है या नहीं।

SIT रिपोर्ट में शामिल होंगे अहम तथ्य

सूत्रों के मुताबिक, नियुक्तियों से जुड़ी यह पूरी जांच विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया, नियुक्ति रिकॉर्ड, दस्तावेजों की उपलब्धता, बैंक खातों की जांच, वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों के बयान शामिल किए जाने की संभावना है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता के पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती, तो जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट में इसका भी स्पष्ट उल्लेख करेंगी।

फिलहाल जांच जारी, निष्कर्ष आना बाकी

फिलहाल पूरा मामला जांच के चरण में है। अब तक भर्ती प्रक्रिया में रिश्वत लेने या किसी ट्रस्ट सदस्य की संलिप्तता आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है। पुलिस और SIT उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

यहां भी पढ़ें-

ग्राम रोजगार सेवकों का लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन: विधानसभा कूच के दौरान पुलिस ने रोका, आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा: 2 बच्चों समेत 5 की मौत, 8 घायल