राम मंदिर दान प्रकरण: अयोध्या एसआईटी जांच की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ी, मुख्यमंत्री योगी ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जुलाई तक अतिरिक्त समय दिया है। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और सभी नामजद आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण की जांच करती एसआईटी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
राम मंदिर दान प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी को 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के चर्चित राम मंदिर दान प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी की समय-सीमा बढ़ाते हुए 15 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन जांच और तथ्यों के सत्यापन के लिए एसआईटी ने सरकार से अतिरिक्त समय की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए जांच एजेंसी को निष्पक्ष और व्यापक जांच पूरी करने का अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी ने पहले ही दिए थे सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राम मंदिर दान प्रकरण जैसे संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा था कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाए तथा जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश रहा है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी तथा किसी भी आरोपी को कानून से बचने का अवसर नहीं मिलेगा।

प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई थीं अहम संस्तुतियां

एसआईटी के प्रमुख सदस्य और लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं और कड़ी प्रशासनिक एवं कानूनी संस्तुतियों का उल्लेख किया गया था। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।

ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर

प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया, जबकि कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कई पहलुओं की हो रही है गहन पड़ताल

जांच एजेंसियां अब दान और चढ़ावे से जुड़े वित्तीय लेनदेन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तार से जांच कर रही हैं। एसआईटी विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। सूत्रों का मानना है कि अंतिम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

15 जुलाई की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

अब सभी की निगाहें 15 जुलाई को एसआईटी द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल मामले की दिशा तय करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि कथित अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही। राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील माने जा रहे इस मामले में सरकार और जांच एजेंसियां हर कदम बेहद सावधानी से उठा रही हैं।

राम मंदिर दान प्रकरण की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद एसआईटी को सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का अवसर मिला है। 15 जुलाई को आने वाली रिपोर्ट से पूरे मामले पर बड़ा खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

यहां भी पढ़ें-

अयोध्या प्रकरण में बढ़ाई गई SIT जांच की समय-सीमा: 15 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

ग्राम रोजगार सेवकों का लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन: विधानसभा कूच के दौरान पुलिस ने रोका, आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी