PoK Crisis: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में JAAC नेता ने कथित तौर पर भारत से मदद और LoC खोलने की अपील की।

नई दिल्ली/अमर भारती। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। इसी बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के एक नेता का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भारत से मानवीय सहायता भेजने और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) को खोलने की अपील की गई है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए इसके दावों को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।
PoK Crisis के बीच भारत से मदद की अपील
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में JAAC के नेता कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बढ़ाए जाने के बाद मानवीय संकट और गंभीर हो गया है।
वीडियो में वह कहते हैं कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो स्थानीय नागरिकों के पास सुरक्षित विकल्प होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत से मानवीय सहायता उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) खोलने की अपील की है।
एलओसी खोलने की उठी मांग
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक जनसभा के दौरान JAAC नेता ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें लाइन ऑफ कंट्रोल की ओर बढ़ना चाहिए। भीड़ ने इसके समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने पुंछ और डोडा सेक्टर के माध्यम से LoC खोलने की भी मांग की और आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की नीतियों के कारण आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, इन दावों और वायरल वीडियो की किसी स्वतंत्र या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।
पिछले महीने से जारी हैं विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले महीने से प्रशासन के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत में प्रदर्शनकारी महंगाई, बिजली दरों, कर व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे थे। समय के साथ कुछ प्रदर्शनों में राजनीतिक नारों और अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग भी सामने आने लगी। कुछ रैलियों में पाकिस्तान की नीतियों के विरोध में नारे लगाए गए, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
JAAC पर प्रतिबंध के बाद बढ़ा विवाद
स्थिति उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने 5 जून को जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) को गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया। प्रशासन ने संगठन पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के आरोप लगाए, जबकि JAAC समर्थकों का कहना है कि वे स्थानीय नागरिकों के अधिकारों और जनहित के मुद्दों को उठा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि संगठन पर प्रतिबंध लगाने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ाया है।
राजनीतिक नियंत्रण पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक स्वायत्तता को लेकर बहस होती रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय राजनीतिक दलों की भूमिका सीमित होती गई है, जबकि इस्लामाबाद का प्रभाव लगातार मजबूत बना हुआ है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज (ICPS) की एक हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के राजनीतिक ढांचे पर लंबे समय से बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सत्ता में रहने वाली पार्टियों को इन क्षेत्रों में चुनावी बढ़त मिलती रही है, जिससे स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मानवीय और राजनीतिक चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो क्षेत्र में मानवीय चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। हालांकि, राशन और दवाओं की व्यापक कमी या बड़े पैमाने पर मानवीय संकट संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। फिलहाल क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया और स्थानीय हालात यह तय करेंगे कि यह संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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