राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों से रिमांड पर पूछताछ की। 900 ग्राम सोना गलाने, नकदी और संपत्ति खरीद के आरोपों की जांच तेज।

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस बहुचर्चित प्रकरण में जेल में बंद तीन आरोपितों-अनुकल्प मिश्र, लवकुश और करुणेश-को पुलिस ने न्यायालय से कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की है। पुलिस रिमांड की अवधि गुरुवार रात 10 बजे समाप्त हो रही है। इस दौरान जांच टीम ने तीनों आरोपितों से लगातार पूछताछ कर चोरी, धन के लेन-देन, सोने के निस्तारण और कथित संपत्तियों की खरीद से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी जुटाई है।
पुलिस लाइन में घंटों चली पूछताछ
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह तीनों आरोपितों को जेल से पुलिस अभिरक्षा में लेने के बाद पुलिस लाइन लाया गया, जहां कई घंटों तक पूछताछ की गई। जांच के दौरान पुलिस ने अनुकल्प मिश्र के पिता रवींद्र मिश्र, चाचा रामेंद्र मिश्र तथा एक सराफा कारोबारी विजय कौशल को भी बुलाकर पूछताछ की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से चोरी किए गए आभूषणों का निस्तारण किस प्रकार किया गया और उससे प्राप्त धन का उपयोग किन-किन कार्यों में हुआ।
900 ग्राम सोना गलाने के आरोप की जांच
पूछताछ में सामने आए कथित बयानों के आधार पर पुलिस यह जांच कर रही है कि अनुकल्प मिश्र ने लगभग 900 ग्राम सोना एक सराफा कारोबारी को गलाने के लिए दिया था। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इसके बदले कितनी राशि प्राप्त हुई और क्या इस धन का उपयोग संपत्ति खरीदने में किया गया। पुलिस इस संबंध में वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में नई धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
भीखापुर में कराया गया घटनास्थल का सत्यापन
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद पुलिस टीम आरोपितों को भीखापुर क्षेत्र भी लेकर गई। यहां उस बाग का सत्यापन कराया गया, जहां पहले गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपित ने कथित रूप से चोरी की धनराशि के बंटवारे की बात कही थी। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वास्तव में वहां धन या अन्य सामान का बंटवारा हुआ था और इस कथित साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे।
अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
पूछताछ के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। आरोपितों ने दावा किया कि मंदिर की व्यवस्था और गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों का उन्हें सहयोग मिला था। पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों का कहना है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। प्रत्येक तथ्य का सत्यापन दस्तावेजों, गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से किया जा रहा है।
नकदी और आभूषणों की बरामदगी पर नजर
पुलिस अब कथित रूप से चोरी किए गए आभूषणों, नकदी और उनसे खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाने में जुटी है। जांच टीम को उम्मीद है कि पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले में कुछ महत्वपूर्ण बरामदगी हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
आगे क्या?
पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद तीनों आरोपितों को दोबारा न्यायालय में पेश किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है और इसकी जांच पर प्रशासन तथा आम लोगों की नजर बनी हुई है।
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