Pakistan Petrol Price Hike: अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज संकट के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल 327.12 और हाई-स्पीड डीजल 375.04 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। एक ओर लाल सागर में हूती हमलों और दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया।
इसी बीच आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 6.39 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल के दाम में 7.83 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया। नई कीमतें 23 जुलाई 2026 से लागू हो गई हैं।
पाकिस्तान में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
नई बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 327.12 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, हाई-स्पीड डीजल का दाम बढ़कर 375.04 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। सरकार के इस फैसले से पहले पेट्रोल 320.73 रुपये और हाई-स्पीड डीजल 367.21 रुपये प्रति लीटर था। नई दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लागू की गई हैं।
जंग और होर्मुज संकट ने बढ़ाई पाकिस्तान की मुश्किल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेल की वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता गहरा गई है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों की ओर से जहाजों पर हमले और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी लंबे व्यवधान से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। 23 जुलाई को ब्रेंट क्रूड छह सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया।
पाकिस्तान में रोज बदलेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बदलती कीमतों के बीच ईंधन की कीमतों की समीक्षा का तरीका भी बदला है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए ईंधन की कीमतों की समीक्षा दैनिक आधार पर की जा रही है। नए सिस्टम के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के औसत के आधार पर पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तय किए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
महंगी LNG खरीदने को मजबूर पाकिस्तान
पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। होर्मुज और आसपास के समुद्री मार्गों में संकट के चलते तेल और गैस की सप्लाई महंगी हो सकती है। इससे पाकिस्तान को LNG और अन्य ऊर्जा संसाधनों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। महंगी ऊर्जा का सीधा असर बिजली उत्पादन, परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।
आर्थिक मदद के लिए अमेरिका से उम्मीद
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव, कर्ज और महंगाई जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अमेरिका से वित्तीय मदद की उम्मीद कर रही है। इसी बीच पाकिस्तान की ओर से अमेरिका के साथ कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं।
पाकिस्तान को उम्मीद है कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों में उसकी भूमिका और अमेरिका के साथ बातचीत उसके लिए आर्थिक मदद का रास्ता खोल सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी संभावित वित्तीय सहायता की शर्तों और स्वरूप को लेकर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आम जनता पर बढ़ेगा महंगाई का दबाव?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा की वस्तुओं और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान में पहले से ही महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर जनता की चिंता बनी हुई है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, अमेरिका-ईरान तनाव, लाल सागर में हमले और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसका सबसे सीधा असर उन देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की ताजा बढ़ोतरी इसी बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट की एक बड़ी झलक है।
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