Aliganj Fire Case में 15 युवाओं की मौत वाले अवैध कॉम्प्लेक्स को LDA ने गिराना शुरू कर दिया है। 30 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट और बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर सवाल बरकरार हैं।

नई दिल्ली/अमर भारती। Aliganj Fire Case: लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत के बाद आखिरकार उस अवैध व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई है, जहां यह दर्दनाक हादसा हुआ था। शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA की प्रवर्तन टीम ने कॉम्प्लेक्स को गिराने का काम शुरू किया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे इलाके को बैरिकेडिंग कर सुरक्षित कर दिया गया है।
15 दिन का अल्टीमेटम खत्म, अब LDA ने शुरू किया ध्वस्तीकरण
अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित भूखंड संख्या MS-102 पर बने इस अवैध कॉम्प्लेक्स को लेकर LDA के विहित न्यायालय ने 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। आदेश में कॉम्प्लेक्स के मालिक वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल को अवैध निर्माण को खुद 15 दिनों के भीतर गिराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन तय समय सीमा 25 जुलाई तक भवन मालिकों की ओर से कॉम्प्लेक्स को नहीं गिराया गया। इसके बाद शनिवार को LDA के प्रवर्तन दस्ते ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
मशीनों को ऊपर पहुंचाने के लिए बनाया गया मलबे का रैंप
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए पहले भवन के ऊपरी हिस्से तक मशीनें पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके लिए मलबे का रैंप तैयार किया गया। इसके बाद कॉम्प्लेक्स के ऊपरी हिस्से को तोड़ने का काम शुरू किया गया। मौके पर LDA के अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद हैं। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन की ओर से लोगों को घटनास्थल से दूर रखने की भी व्यवस्था की गई है।
‘काले धब्बे’ मिट जाएंगे, लेकिन 15 मौतों का दर्द बाकी
जिस इमारत में 22 जून को आग लगी थी, उसकी दीवारों पर बने आग के गहरे काले निशान अब जल्द ही मिट जाएंगे। अवैध कॉम्प्लेक्स को गिराए जाने के बाद घटनास्थल का स्वरूप बदल जाएगा, लेकिन इस हादसे से जुड़े सवाल अब भी कायम हैं। आग में 15 युवाओं की मौत और नौ लोगों के घायल होने के बाद उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों पर तेजी से कड़ी कार्रवाई होगी। हादसे के बाद जांच के आदेश दिए गए और जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच शुरू की गई। लेकिन घटना के करीब एक महीने बाद भी बड़े सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
जांच रिपोर्ट का इंतजार, जिम्मेदारी तय करने में देरी
हादसे के बाद दो सदस्यीय SIT और LDA की आंतरिक जांच के जरिए जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है। इस देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित लापरवाही और अनदेखी के कारण अवैध निर्माण चलता रहा। इसके बावजूद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया धीमी रही। कार्रवाई के नाम पर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया, लेकिन बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय होने का इंतजार अभी भी जारी है।
पांच अधिकारी और कर्मचारी निलंबित
अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासन की ओर से पांच अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। हालांकि, हादसे से जुड़े मुख्य सवाल अब भी बने हुए हैं। आखिर अवैध कॉम्प्लेक्स का निर्माण कैसे हुआ? इसे संचालित करने की अनुमति किस स्तर पर मिली? सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
एक भवन मालिक अब भी फरार
घटना के बाद कॉम्प्लेक्स के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, एक भवन मालिक की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। फरार आरोपी पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इसको लेकर भी प्रशासन और जांच एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, तब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
22 जून के हादसे के बाद CM योगी ने दिए थे जांच के आदेश
22 जून को अलीगंज के अवैध भवन में लगी भीषण आग में 15 युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि नौ लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौके पर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात और एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को SIT जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच के लिए सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद उम्मीद थी कि हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तेजी से बड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन समय बीतने के साथ जांच और कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठने लगे।
अब अवैध कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। हालांकि, असली सवाल अब भी यही है कि क्या केवल इमारत गिरा देने से 15 मौतों की जिम्मेदारी तय हो जाएगी? हादसे के पीछे कथित लापरवाही, अवैध निर्माण और सिस्टम की विफलता के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी, इसका जवाब अभी भी जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
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