12 साल में सवा लाख छात्रों ने सुसाइड किया: राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा

विधेयक की प्रभावशीलता पर भी सवाल, इसमें आंकड़ों के अलावा कुछ नया नहीं है: खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेपर लीक बिल और छात्र मुद्दों पर सरकार को घेरा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा गुरुवार को चर्चा का विषय बना रहा। कांग्रेस अध्यक्ष ने पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल पर बहस के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में सवा लाख छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने नए विधेयक की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसमें आंकड़ों के अलावा कुछ नया नहीं है।

मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा: छात्रों की समस्याओं को नहीं सुना गया

राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा था कि सरकार ने पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन के दौरान उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में पहली बार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ है।

खड़गे ने कहा कि बाद में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने छात्रों को बुलाकर बातचीत की। उनके अनुसार, यदि यह पहल पहले की गई होती तो छात्रों को प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

पेपर लीक बिल पर कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल

मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा था कि पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक में केवल आंकड़े बदले गए हैं और इससे वास्तविक समस्या का समाधान नहीं होगा।

खड़गे के अनुसार, इस कानून से पेपर चोरी या पेपर लीक में शामिल लोगों पर प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पेपर चुराने वाले बचते रहेंगे और छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

राज्यसभा में पेश हुआ संशोधन बिल

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पेपर लीक से संबंधित संशोधन बिल पेश किया। इससे पहले लोकसभा में इस विधेयक पर लगभग सात घंटे तक चर्चा हुई थी, जिसके बाद इसे पारित कर दिया गया था।

विधेयक में परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच दो माह के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।

बिल में 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान

संशोधन बिल के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के गंभीर मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है। इसमें दोषियों को 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है।

इसके अलावा संगठित अपराध से जुड़े मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। राज्यसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

पेपर लीक रोकने की चुनौती बरकरार

मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा और पेपर लीक बिल पर उनकी आलोचना ने राज्यसभा की बहस को राजनीतिक रंग दे दिया। एक ओर कांग्रेस ने विधेयक की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए, वहीं सरकार इसे परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। अब बिल के अगले चरण पर सभी की नजरें टिकी हैं। (Expose India)

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