
लखनऊ। वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे के अवसर पर केजीएमयू के कलाम सेंटर में कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कंधे की चोट के ऑपरेशन के बाद मरीजों के पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) खेलों के दौरान होने वाली शोल्डर इंजरी से बचाव तथा फिजियोथेरेपी की आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. केके सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान बड़ी संख्या में फिजियोथेरेपिस्ट, चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
सीएमई में अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. योगेश माध्यान ने कंधे में चोट के ऑपरेशन के बाद मरीजों के रिहैबिलिटेशन की आधुनिक तकनीकों और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज को सामान्य गतिविधियों में वापस लाने के लिए व्यवस्थित और चरणबद्ध फिजियोथेरेपी बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक चौधरी ने खेलों के दौरान होने वाली शोल्डर इंजरी, उसके कारणों, बचाव के उपायों तथा खिलाड़ियों द्वारा बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
1951 में हुआ था वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ फिजिकल थेरेपी का गठन
कार्यक्रम के उद्देश्य और वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे के महत्व पर डॉ. अरविन्द कुमार ने विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1951 में यूनाइटेड किंगडम में वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ फिजिकल थेरेपी का गठन किया गया था। इसी के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष फिजियोथेरेपी की वैश्विक एकता, जागरूकता और सुदृढ़ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे मनाया जाता है। उन्होंने केजीएमयू में विभिन्न विभागों में संचालित फिजियोथेरेपी सेवाओं के साथ-साथ पीएमआर विभाग में संचालित डिग्री एवं डिप्लोमा फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रमों की जानकारी भी दी। डॉ. कुमार ने फिजियोथेरेपी सेवाओं के समुचित संचालन और विस्तार के लिए केजीएमयू में स्वतंत्र फिजियोथेरेपी विभाग की स्थापना की आवश्यकता पर जोर दिया।
कुलपति ने फिजियोथेरेपी के महत्व को बताया अहम
केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द ने वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे के अवसर पर केजीएमयू के कलाम सेंटर में उपस्थित सभी फिजियोथेरेपिस्टों एवं छात्र-छात्राओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में फिजियोथेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने, बीमारी अथवा चोट के बाद मरीजों को पुनः सामान्य जीवन में लाने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने केजीएमयू के विभिन्न विभागों में फिजियोथेरेपी की व्यापक सेवाओं को देखते हुए स्वतंत्र विभाग के गठन के संबंध में आश्वासन दिया।
फिजियोथेरेपी सुविधाओं के विस्तार और संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन
डीन एलाईड एंड हेल्थ साइंसेज प्रो. केके. सिंह ने भी कार्यक्रम में उपस्थित सभी फिजियोथेरेपिस्टों को वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में फिजियोथेरेपी की आवश्यकता और इसके बढ़ते महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए फिजियोथेरेपी से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान में फिजियोथेरेपी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
फिजियोथेरेपिस्टों की समस्याओं के प्राथमिकता से निस्तारण का आश्वासन
उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल फिजियोथेरेपिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल मिश्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं सभी वक्ताओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने फिजियोथेरेपिस्टों की विभिन्न समस्याओं से मुख्य अतिथि को अवगत कराया। इस पर मुख्य अतिथि की ओर से आश्वासन दिया गया कि फिजियोथेरेपिस्ट स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। साथ ही संघ के पदाधिकारियों के साथ शीघ्र ही औपचारिक बैठक आयोजित करने की बात कही गई। विभाग के गठन के संबंध में संघ की ओर से प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अपेक्षा भी व्यक्त की गई।
25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर डॉ. तेजबीर सिंह सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान केजीएमयू के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. तेजबीर सिंह को 25 वर्ष की कुशल सेवा पूरी करने पर सम्मानित किया गया। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द ने उन्हें मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके दीर्घकालीन सेवाकाल और फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में योगदान की सराहना की गई।