
लखनऊ। अति प्रचंड चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का अवशेष अब कमजोर होकर अवदाब में बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:30 बजे भारतीय मानक समय पर जारी राष्ट्रीय बुलेटिन संख्या 31 के अनुसार, यह मौसम तंत्र दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण ओडिशा के ऊपर सक्रिय है। इसके अगले कुछ घंटों तक उत्तर की ओर बढ़ते रहने और गुरुवार शाम के आसपास सुव्यक्त निम्न दबाव क्षेत्र में कमजोर होने की प्रबल संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, उससे लगे दक्षिण ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उत्तर-पूर्वी तेलंगाना के ऊपर सक्रिय रहा गहरा अवदाब पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 22 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर की ओर बढ़ा। इस दौरान इसकी तीव्रता में कमी आई और यह गहरे अवदाब से कमजोर होकर अवदाब में तब्दील हो गया। हालांकि, मौसम तंत्र के कमजोर होने के बावजूद इसकी स्थिति और आगे की दिशा पर निगरानी रखी जा रही है।
जगदलपुर के पास केंद्रित है मौसम तंत्र
मौसम विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह 5:30 बजे यह अवदाब दक्षिण छत्तीसगढ़ तथा उससे लगे दक्षिण ओडिशा के ऊपर 19.0 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 81.9 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास केंद्रित था। इसका केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से लगभग 20 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था।
इसके अलावा ओडिशा के भवानीपटना से यह लगभग 170 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम, टिटलागढ़ से 210 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और संबलपुर से करीब 350 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। वहीं, रायपुर से इसकी दूरी लगभग 250 किलोमीटर दक्षिण बताई गई है।
इन स्थानों के संदर्भ में मौसम तंत्र की स्थिति से स्पष्ट है कि इसका प्रभाव क्षेत्र मुख्य रूप से दक्षिण छत्तीसगढ़, दक्षिण ओडिशा और आसपास के इलाकों से जुड़ा हुआ है। आने वाले घंटों में इसकी दिशा और तीव्रता में होने वाले बदलाव मौसम की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
छह घंटे में बदली तूफान की तीव्रता
‘अर्नब’ के अवशेष का कमजोर होना मौसम की मौजूदा गतिविधियों का प्रमुख घटनाक्रम है। पहले यह प्रणाली गहरे अवदाब के रूप में सक्रिय थी, लेकिन पिछले छह घंटों के दौरान उत्तर की ओर बढ़ने के साथ इसकी ताकत में कमी आई। अब यह अवदाब के स्तर पर पहुंच गई है।
मौसम विज्ञान में अवदाब एक ऐसा निम्न वायुदाब तंत्र होता है, जिसमें आसपास की तुलना में वायुदाब कम रहता है और हवाओं की गति तथा वर्षा जैसी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसकी तीव्रता, गति और दिशा के आधार पर मौसम विभाग आगे की परिस्थितियों का आकलन करता है।
हालांकि, केवल तूफान के कमजोर पड़ने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित क्षेत्रों में मौसम का असर पूरी तरह समाप्त हो गया है। ऐसे तंत्रों के आगे बढ़ने के दौरान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बादल, बारिश और हवाओं में बदलाव हो सकते हैं। इनकी वास्तविक स्थिति के लिए मौसम विभाग की नवीनतम चेतावनियों और पूर्वानुमानों पर ध्यान देना जरूरी है।
शाम तक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, यह अवदाब लगभग उत्तर दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इसके बाद 29 अक्टूबर की शाम के आसपास इसके और कमजोर होकर सुव्यक्त निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की बहुत संभावना है।
यदि पूर्वानुमान के अनुसार प्रणाली की तीव्रता में कमी जारी रहती है, तो यह चक्रवाती तूफान के अवशेष से विकसित मौसम तंत्र के कमजोर होने की अगली अवस्था होगी। हालांकि, इसकी स्थिति और गति में होने वाले बदलावों के आधार पर विभाग आगे के पूर्वानुमान को अद्यतन कर सकता है।
दो डॉप्लर रडारों से निगरानी
मौसम विभाग इस प्रणाली पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसके लिए रायपुर और संबलपुर स्थित डॉप्लर मौसम रडारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रडार के जरिए मौसम तंत्र की गतिविधियों और आसपास के क्षेत्रों में विकसित हो रही मौसमी परिस्थितियों की निगरानी की जाती है।
फिलहाल जारी बुलेटिन में अवदाब की स्थिति, पिछले छह घंटों में इसकी गति और आगे कमजोर होने की संभावना का उल्लेख किया गया है। इस बुलेटिन में किसी विशेष जिले के लिए वर्षा की मात्रा, हवा की अधिकतम गति या अलग से जारी चेतावनी का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन बिंदुओं पर अतिरिक्त जानकारी के बिना किसी क्षेत्र में भारी बारिश या तेज हवाओं का निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
कुल मिलाकर, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का अवशेष अब कमजोर होकर अवदाब बन चुका है और दक्षिण छत्तीसगढ़ तथा दक्षिण ओडिशा के आसपास सक्रिय है। मौसम विभाग के अनुसार, इसके उत्तर की ओर बढ़ते हुए गुरुवार शाम तक सुव्यक्त निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। अगले कुछ घंटों में इसकी दिशा, तीव्रता और संभावित मौसमी प्रभावों पर नजर बनी रहेगी।