अमेरिका ईरान तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर 24 घंटे का अल्टीमेटम, समुद्री व्यापार पर बढ़ी चिंता

अमेरिका ईरान तनाव के बीच वॉशिंगटन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। जानिए क्या हैं अमेरिकी मांगें और क्यों अहम है Strait of Hormuz

होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा के बीच अमेरिका ईरान तनाव
अमेरिका ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की सार्वजनिक घोषणा की मांग की है।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिका ईरान तनाव एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला रहेगा और समुद्री व्यापारिक जहाजों पर किसी भी प्रकार के हमले नहीं होंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि तय समय के भीतर ऐसा नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने ईरान तक अपना संदेश सीधे और क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से पहुंचाया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि ईरान निर्धारित समय के भीतर सार्वजनिक प्रतिबद्धता नहीं देता है तो वॉशिंगटन आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। हालांकि, संभावित कार्रवाई के स्वरूप को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।

अमेरिका की प्रमुख मांगें क्या हैं?

अमेरिका ईरान तनाव के बीच वॉशिंगटन की प्रमुख मांगें स्पष्ट बताई जा रही हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए सुरक्षित घोषित करे।
  • समुद्री व्यापारिक जहाजों पर किसी भी प्रकार के हमले रोकने की सार्वजनिक घोषणा करे।
  • अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का सम्मान करने का आश्वासन दे।
  • समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क या बाधा न लगाए।

अमेरिका का कहना है कि इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में स्थिरता बनी रहेगी।

समझौते के उल्लंघन का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान ने पिछले महीने हुए एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) की भावना का उल्लंघन किया है। वॉशिंगटन का दावा है कि हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। अमेरिका का यह भी कहना है कि इन घटनाओं के जवाब में उसे दो बार सैन्य प्रतिक्रिया देनी पड़ी। हालांकि, इन दावों पर ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

ओमान में अहम बैठक पर टिकी नजर

तनावपूर्ण माहौल के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी और ओमानी अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता प्रमुख मुद्दे रहने की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इस बैठक में शामिल होंगे। ईरानी मीडिया का कहना है कि यह वार्ता पिछले कुछ महीनों से चल रहे क्षेत्रीय संवाद का हिस्सा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद रणनीतिक माना जाता है। दुनिया के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध पैदा होता है तो उसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी कारण अमेरिका सहित कई देश चाहते हैं कि इस समुद्री मार्ग पर अंतरराष्ट्रीय नौवहन बिना किसी बाधा के जारी रहे।

वैश्विक बाजार की नजर घटनाक्रम पर

अमेरिका ईरान तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। ऊर्जा बाजार, शिपिंग कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें ओमान में होने वाली वार्ता और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

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