बंगाल STF ने संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मॉड्यूल मामले में हमीम मंडल की महिला मित्र अर्पिता सरकार को झारखंड से गिरफ्तार किया।

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मॉड्यूल की जांच में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए हमीम मंडल की महिला मित्र अर्पिता सरकार को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि अर्पिता केवल हमीम की परिचित नहीं थी, बल्कि पूरे संदिग्ध नेटवर्क की सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रही थी। उसे ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाया गया है, जहां दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी।
जिम से गिरफ्तार हुआ था हमीम मंडल
गौरतलब है कि गुरुवार को STF ने पूर्व बर्द्धमान जिले के एक आवासीय परिसर स्थित जिम से हमीम मंडल को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसके संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े तत्वों, कुख्यात गैंग्स्टर शहजाद भट्टी और पुलवामा हमले के आरोपित सज्जाद भट के नेटवर्क से थे। हमीम की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल और डिजिटल डिवाइस की जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग सामने आए, जिनके आधार पर अर्पिता सरकार तक पहुंचा गया।
व्हाट्सएप चैट और एन्क्रिप्टेड ऐप से मिले संकेत
STF के अनुसार, हमीम और अर्पिता के बीच हुई कई व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल संवादों से संदिग्ध नेटवर्क के बारे में अहम जानकारियां मिली हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि दोनों सामान्य फोन कॉल के बजाय एक विशेष एन्क्रिप्टेड मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए संपर्क में रहते थे।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दोनों को अलग-अलग जिम्मेदारियां और कथित “असाइनमेंट” सौंपे जाते थे। एजेंसी अब इनके डिजिटल नेटवर्क, ऑनलाइन गतिविधियों और अन्य संभावित संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
भर्ती और नेटवर्क विस्तार की जांच
जांच एजेंसी का दावा है कि अर्पिता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों के जरिए नए लोगों तक पहुंच बनाने और संदिग्ध नेटवर्क के विस्तार में भूमिका निभा रही थी। STF यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मॉड्यूल के संपर्क में कितने लोग आए और किन क्षेत्रों में इसकी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से संपर्क स्थापित करने और लोगों को प्रभावित करने के तरीकों की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक हस्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाने का आरोप
STF की जांच में यह भी सामने आया है कि अर्पिता के जरिए कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों से संबंधित जानकारियां जुटाने की कोशिश की जा रही थी। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि किन व्यक्तियों की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य विवरणों में रुचि दिखाई गई और इन सूचनाओं का उद्देश्य क्या था। हालांकि जांच अभी शुरुआती चरण में है और एजेंसी सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
फंडिंग और विदेशी संपर्कों की पड़ताल
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू संदिग्ध विदेशी संपर्क और संभावित फंडिंग नेटवर्क भी है। STF यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों किन विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और क्या पश्चिम बंगाल तथा झारखंड के रास्ते किसी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।
संयुक्त पूछताछ से खुल सकते हैं नए राज
STF का मानना है कि हमीम मंडल और अर्पिता सरकार से संयुक्त पूछताछ में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही शहजाद भट्टी गिरोह और अन्य संदिग्ध संपर्कों की प्रकृति की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल एजेंसी पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के अंतिम निष्कर्षों के आधार पर ही होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अब इस बात पर है कि क्या यह नेटवर्क किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था या अलग-अलग समूहों से जुड़ा हुआ था।
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