बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने तीस्ता नदी परियोजना पर भारत की चिंताओं को लेकर पहली बार प्रतिक्रिया दी।

नई दिल्ली/अमर भारती। बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन इस परियोजना में केवल बांग्लादेश के अनुरोध पर शामिल हुआ है और उसका कोई अन्य रणनीतिक या राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन का मकसद केवल परियोजना के विकास में सहयोग देना और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। यह बयान गुरुवार को ढाका स्थित चीनी दूतावास में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सामने आया। यह प्रेस ब्रीफिंग हाल ही में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के बाद आयोजित की गई थी।
तारिक रहमान की चीन यात्रा में तीस्ता परियोजना रही प्रमुख एजेंडा
पिछले महीने के अंत में प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना प्रमुख रही। याओ वेन ने कहा कि तीस्ता नदी के आसपास रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका इस परियोजना से जुड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन परियोजना को सफल बनाने के लिए तकनीकी, वित्तीय और अन्य आवश्यक सहयोग देने को तैयार है।
यूनुस सरकार के समय हुए समझौते पर भी दी सफाई
प्रेस वार्ता में जब पत्रकारों ने पूर्व अंतरिम सरकार के कार्यकाल में एक चीनी कंपनी और बांग्लादेशी संस्था के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का जिक्र किया, तो याओ वेन ने कहा कि वह समझौता केवल एक कंपनी और सरकारी एजेंसी के बीच था। उन्होंने बताया कि अब यह सहयोग दोनों देशों के बीच सरकार-स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना के अगले चरण में चीन विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण करेगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
भारत की चिंताओं पर चीन का जवाब
जब पत्रकारों ने पूछा कि भारत ने इस परियोजना को लेकर चिंता जताई है और यदि ऊपरी धारा से पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो परियोजना कितनी प्रभावी होगी, तो याओ वेन ने कहा कि यह चीन का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन केवल बांग्लादेश की जरूरतों और अनुरोध के आधार पर इस परियोजना में सहयोग कर रहा है। भारत से जुड़े जल प्रबंधन या अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर टिप्पणी करना चीन का उद्देश्य नहीं है।
BCIM कॉरिडोर पर भी दिया बड़ा बयान
याओ वेन ने बांग्लादेश-म्यांमार-चीन आर्थिक कॉरिडोर पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह कोई नई पहल नहीं है। करीब 15 वर्ष पहले चीन ने बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) आर्थिक कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह परियोजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि चीन अब भी इस क्षेत्रीय संपर्क परियोजना को लेकर सकारात्मक रुख रखता है और इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत के लिए भी रखा खुला प्रस्ताव
चीन के राजदूत ने कहा कि यदि भारत भविष्य में BCIM कॉरिडोर से जुड़ना चाहता है तो चीन उसका स्वागत करेगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें शामिल होना या नहीं होना पूरी तरह भारत का संप्रभु निर्णय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल चीन बांग्लादेश और म्यांमार के साथ आर्थिक संपर्क और बुनियादी ढांचा विकास की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
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