CJP फंडिंग विवाद: CJP को मिले 1 करोड़ रुपये के फंड पर विवाद, RTI एक्टिविस्ट ने ECI और CBIC से की शिकायत

CJP फंडिंग विवाद को लेकर तीन संस्थाओं में शिकायत

CJP फंडिंग विवाद पर शिकायत
RTI एक्टिविस्ट ने CJP फंडिंग और पंजीकरण की जांच की मांग की।

डिजिटल डेस्क, सूरत। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को मिले 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने चुनाव आयोग, सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) और महाराष्ट्र सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज कर संगठन और उससे जुड़े लोगों की जांच की मांग की है।

शिकायत में CJP की फंडिंग, कानूनी स्थिति और संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

CJP फंडिंग विवाद को लेकर तीन संस्थाओं में शिकायत

CJP फंडिंग विवाद को लेकर अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने तीन अलग-अलग संस्थाओं में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग के समक्ष CJP की गतिविधियों को लेकर शिकायत दी गई है। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर CBIC में शिकायत दर्ज कर इस राशि पर 18 प्रतिशत GST लगाने की मांग की गई है।

तिवारी का कहना है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों में शामिल है और जनता से धन प्राप्त कर रहा है, तो उसकी वैधानिक स्थिति और वित्तीय स्रोतों की जांच की जानी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित एजेंसियों से मामले की जांच की मांग की है।

आर्थिक स्थिति को लेकर उठाए सवाल

CJP फंडिंग विवाद के बीच अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उन्हें नौकरी के दौरान लगभग 60,000 से 65,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था।

तिवारी ने सवाल उठाया कि यदि आय सीमित थी, तो परिवार अपने बच्चों की अमेरिका में पढ़ाई जैसे खर्चों को कैसे वहन कर पाया। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है।

महाराष्ट्र सरकार से आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग

अमित तिवारी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि कहीं यह मामला आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा तो नहीं है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिकायत का उद्देश्य तथ्यों की जांच कराना है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। तिवारी के अनुसार, सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और संगठनों की वित्तीय पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

CJP के पंजीकरण पर भी उठे सवाल

CJP फंडिंग विवाद के दौरान अमित तिवारी ने संगठन के कानूनी दर्जे को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि CJP बिना पंजीकरण के राजनीतिक दल की तरह कार्य कर रहा है और लोगों से चंदा भी प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन राजनीतिक पार्टी की तरह कार्य करता है और फंड प्राप्त करता है, तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकृत होना चाहिए। तिवारी का दावा है कि CJP एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन उसे 1 करोड़ रुपये का फंड मिला है। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से मामले में कार्रवाई की मांग की है।

CJP आंदोलन की भी की आलोचना

CJP फंडिंग विवाद के साथ-साथ अमित तिवारी ने CJP के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत NEET पेपर लीक मामले में छात्रों की आवाज उठाने के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन बाद में यह अपने मूल मुद्दे से भटक गया।

तिवारी का कहना है कि जब तक आंदोलन शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विषयों पर केंद्रित था, तब तक कोई आपत्ति नहीं थी। हालांकि, बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं के साथ संबंधों को लेकर गलत बातें कही गईं।

एजेंसियों से कार्रवाई की मांग

अमित तिवारी ने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर संबंधित संस्थाओं में शिकायत दर्ज कराई गई है। उनका मानना है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, CJP फंडिंग विवाद को लेकर विभिन्न एजेंसियों के समक्ष शिकायतें दर्ज हैं। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर संबंधित संस्थाओं के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

मामले की वर्तमान स्थिति

फिलहाल यह मामला शिकायतों और आरोपों के स्तर पर है। RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने चुनाव आयोग, CBIC और महाराष्ट्र सरकार से जांच की मांग की है। दूसरी ओर, शिकायतों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। CJP फंडिंग विवाद ने संगठन की फंडिंग, कानूनी स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। (Expose India)

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