
धौरहरा, खीरी। धौरहरा कस्बे और कोतवाली क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खेत समतलीकरण और निजी पटान के नाम पर मिट्टी का खनन कर उसे फुटकर में 1,200 रुपये से अधिक प्रति ट्रॉली के दाम पर बेचा जा रहा है। इससे जरूरतमंद लोगों को मिट्टी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिला प्रशासन की बैठकों में अवैध खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाते हैं और कार्रवाई के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन धौरहरा क्षेत्र में स्थिति अलग नजर आ रही है। आरोप है कि खेत समतलीकरण और निजी पटान की आड़ में मिट्टी निकालकर उसे व्यावसायिक रूप से बेचा जा रहा है।
लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि खनन में लगे लोगों तक अधिकारियों की गश्त और संभावित कार्रवाई की सूचना पहले ही पहुंच जाती है। इसके चलते कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य साधन हटा लिए जाते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने खेत समतलीकरण और निजी पटान के नाम पर किए जा रहे मिट्टी खनन की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं सदर लेखपाल की कार्यशैली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि प्रशासन धौरहरा क्षेत्र में कथित मिट्टी खनन की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।