UNSC में भारत ने प्रतिबंधों से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को वैध ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए।

नई दिल्ली/अमर भारती। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रतिबंधों से जुड़े फैसलों में ज्यादा पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की है। बुधवार को परिषद के कामकाज के तरीकों पर हुई खुली बहस में भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
यूएन में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदगी को संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका बयान पाकिस्तान की आतंकवाद से निपटने की भूमिका और आतंकवादियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नामांकन प्रक्रिया पर भारत की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं की ओर इशारा करता है।
आतंकियों को वैध ठहराने का मंच न बने UNSC
योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद में मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने या सूची से हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
UNSC में भारत का कहना है कि प्रतिबंधित सूचियां सार्वजनिक की जाती हैं, लेकिन प्रस्तावों को खारिज करने या उन पर तकनीकी रोक लगाए जाने के पीछे के कारण हमेशा सार्वजनिक नहीं किए जाते। भारत लंबे समय से इस प्रक्रिया में ज्यादा जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करता रहा है।
पाकिस्तान और चीन की भूमिका पर भारत का इशारा
भारत ने अपने बयान में किसी देश का सीधे नाम लिए बिना आतंकवाद से जुड़े मामलों में राजनीतिक हितों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। भारत पहले भी 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति की कार्यप्रणाली को लेकर UNSC में अपनी चिंता जाहिर करता रहा है।
भारत की ओर से पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाते रहे हैं। ऐसे प्रस्तावों पर चीन की ओर से तकनीकी रोक या होल्ड लगाए जाने के मामले भी सामने आए हैं। इसी संदर्भ में भारत की पारदर्शिता की मांग को पाकिस्तान और चीन की भूमिका की परोक्ष आलोचना के तौर पर देखा जा रहा है।
UNSC की सहायक संस्थाओं में नियुक्तियों में देरी पर सवाल
भारत ने सुरक्षा परिषद UNSC की सहायक संस्थाओं के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। योजना पटेल ने कहा कि 2026 के आठ महीने बीतने के बावजूद कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं। इनमें 1267 अल-कायदा और तालिबान प्रतिबंध समितियों की निगरानी से जुड़े पद भी शामिल हैं। भारत ने इन नियुक्तियों को जल्द पूरा करने के लिए स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की। भारत का तर्क है कि नियुक्तियों में देरी का असर सुरक्षा परिषद की सहायक संस्थाओं के कामकाज पर पड़ता है।
गैर-स्थायी सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने की मांग
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन समेत सुरक्षा परिषद की प्रमुख प्रक्रियाओं में निर्वाचित गैर-स्थायी सदस्यों की भूमिका बढ़ाने की भी मांग की। भारत का कहना है कि सुरक्षा परिषद UNSC की मौजूदा कार्यप्रणाली को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। इसके लिए परिषद के निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी और अधिक पारदर्शिता जरूरी है।
भारत बोला- 1945 की दुनिया अब बदल चुकी है
योजना पटेल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC के मौजूदा ढांचे में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय की वैश्विक व्यवस्था और आज की दुनिया में बड़ा बदलाव आ चुका है। भारत ने कहा कि आठ दशक पहले की परिस्थितियों के आधार पर सुरक्षा परिषद के गठन और कामकाज को हमेशा के लिए तय नहीं किया जा सकता। परिषद की संरचना और कार्यप्रणाली में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रतिबिंबित करने वाले बदलाव जरूरी हैं।
UNSC सुधार को लेकर भारत का जोर
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की बढ़ी हुई सदस्यता को सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। ताजा बयान में भारत ने एक बार फिर UNSC की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक भागीदारी की जरूरत को रेखांकित किया है। साथ ही आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों के मामलों में राजनीतिक हितों के बजाय ठोस आधार और स्पष्ट प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।
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