नेपाल में भागने की फिराक में था ममता का पुष्पा, बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़ा, अब पुष्पा झुका भी और काले साम्राज्य का काला चिट्ठा खुला भी?

Jahangir Khan, TMC Leader, TMC Candidate, Trinamool Congress
Jahangir Khan, TMC Leader, TMC Candidate, Trinamool Congress

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व उम्मीदवार जहांगीर खान को पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जहांगीर खान लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था और उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों में उसकी तलाश की जा रही थी। बताया जा रहा है कि वह कथित तौर पर देश छोड़कर नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया। हालांकि, गिरफ्तारी किस स्थान से और किस परिस्थितियों में की गई, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे ऑपरेशन से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक कर सकती है।

चुनाव के बाद से गायब था जहांगीर खान

जानकारी के मुताबिक, हालिया विधानसभा चुनाव के बाद से ही जहांगीर खान सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब था। राजनीतिक गतिविधियों में भी उसकी मौजूदगी नहीं देखी जा रही थी। इसी बीच पुलिस और जांच एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी थीं। जांच अधिकारियों का कहना है कि जहांगीर खान के खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई लंबित थी और वह लगातार जांच से बचने का प्रयास कर रहा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, दंगा भड़काने और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े कुल सात मामले दर्ज हैं।

तकनीकी सर्विलांस से मिली सफलता

जहांगीर खान की गिरफ्तारी के पीछे एसटीएफ की तकनीकी निगरानी और खुफिया रणनीति को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने उसके करीबी सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी। इसी दौरान एक सहयोगी के मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डिटेल्स के जरिए महत्वपूर्ण सुराग मिले। इन जानकारियों के आधार पर एसटीएफ की टीम जहांगीर खान तक पहुंचने में सफल रही। इसके बाद एक विशेष अभियान चलाकर उसे नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

ईडी की जांच के दायरे में भी है मामला

जहांगीर खान सिर्फ आपराधिक मामलों में ही नहीं, बल्कि आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी जांच एजेंसियों के रडार पर था। उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। जांच एजेंसियां उसके वित्तीय लेन-देन और कथित आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। माना जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

हाईकोर्ट से मिली राहत समाप्त होने के बाद बढ़ा दबाव

कानूनी स्तर पर जहांगीर खान को पहले कोलकाता हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत मिली हुई थी। इस राहत के चलते पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। हालांकि, राहत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत ने सुरक्षा बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया और पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।

चुनावी राजनीति में भी रहा चर्चित चेहरा

जहांगीर खान को तृणमूल कांग्रेस ने हालिया चुनाव में फलता विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि चुनाव प्रचार के अंतिम दिन उसने अचानक चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। चुनाव के दौरान वह एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में भी सुर्खियों में रहा था। उसके कई बयान और राजनीतिक गतिविधियां उस समय चर्चा का विषय बनी थीं। फलता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में अंततः भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली थी।

आगे की जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल एसटीएफ जहांगीर खान से पूछताछ कर रही है और उसके खिलाफ दर्ज मामलों की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसके साथ कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। आने वाले दिनों में उसे अदालत में पेश किया जा सकता है। इस गिरफ्तारी को पश्चिम बंगाल पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है और अब सभी की नजर आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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