JSSC CGL विवाद: ऑटो चलाकर बने अफसर, 7 महीने बाद नौकरी गई

JSSC CGL विवाद के खिलाफ प्रदर्शन करते अनिल रजक
JSSC CGL विवाद के खिलाफ प्रदर्शन करते अनिल रजक

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड में JSSC CGL विवाद के बाद उन नवनियुक्त कर्मचारियों का भविष्य अधर में है, जिन्होंने परीक्षा के बाद सरकारी नौकरी हासिल की थी। इन्हीं में कोडरमा के अनिल रजक भी शामिल हैं, जिन्होंने पिता के निधन के बाद ऑटो चलाकर परिवार संभाला और पढ़ाई जारी रखी। सीजीएल में चयन के बाद उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिला था, लेकिन अब परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ गई है।

JSSC CGL विवाद के बाद सड़क पर पहुंचे अनिल रजक

झारखंड सरकार की ओर से जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ नवनियुक्त कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। अनिल रजक भी अपनी नौकरी बचाने की मांग को लेकर रांची पहुंचे हैं।

अनिल के मुताबिक, वह करीब सात महीने से उसी कार्यालय में काम कर रहे थे, जहां अब उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया। उनके लिए नौकरी मिलने का वह सफर आसान नहीं था। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने ऑटो चलाकर घर चलाया और दिहाड़ी के बाद पढ़ाई के लिए समय निकाला।

बोलने में परेशानी के बावजूद अनिल ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मेहनत के बाद उनका चयन सीजीएल में हुआ और उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिला।

CM के हाथों मिला था नियुक्ति पत्र

अनिल रजक के लिए नियुक्ति पत्र हासिल करना बेहद अहम पल था। रांची में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन्हें खुद नियुक्ति पत्र दिया था। उस समय जिस नौकरी को उनकी मेहनत और संघर्ष की सफलता माना जा रहा था, वही नौकरी अब JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनके हाथ से जाती दिख रही है।

अनिल का कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत से परीक्षा पास की थी। अब उन पर नौकरी पाने के लिए पैसे देने का आरोप लग रहा है, जबकि उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई गड़बड़ी है तो जांच की जाए और उसे साबित किया जाए।

‘40 लाख देकर नौकरी लेने का दाग लगाया जा रहा’

‘द फॉलोअप’ की एक वीडियो में अनिल ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से उन्हें ताज पहनाया था और अब वही ताज छीनकर उन्हें सड़क पर खड़ा कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि उन पर 40 लाख रुपये देकर नौकरी लेने का दाग लगाया जा रहा है। अनिल ने जांच में हर तरह से सहयोग करने की बात कही। उनका कहना है कि बिना उनसे बातचीत किए सीधे फैसला ले लिया गया।

अनिल ने भावुक होकर कहा कि अब उनके पास कुछ नहीं बचा है और वह रांची से घर लौटने की स्थिति में भी नहीं हैं। उन्होंने सरकार से अपनी बात सुनने की अपील करते हुए कहा कि अगर वह गलत हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाए, लेकिन अगर उनकी कोई गलती नहीं है तो उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों का सवाल- एक की सजा सबको क्यों?

JSSC CGL विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे नवनियुक्त कर्मचारियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन उसका असर सभी चयनित अभ्यर्थियों पर नहीं पड़ना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि किसी एक व्यक्ति की कथित गलती की सजा सभी उम्मीदवारों को क्यों मिले। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो ओएमआर शीट के आधार पर एक-एक उम्मीदवार की जांच कर सकती है।

उनका तर्क है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन सभी नियुक्तियों को एक साथ रद्द करना उनके साथ अन्याय है।

22 परीक्षाएं रद्द, 17 की जांच CID को

कच्चे कंटेंट के मुताबिक, झारखंड सरकार ने JSSC CGL समेत 22 परीक्षाओं को कैंसिल करने का फैसला लिया है। इसके अलावा 2014 से अब तक हुई 17 परीक्षाओं की जांच CID को सौंप दी गई है।

सरकार ने छह अतिरिक्त परीक्षाओं को पोस्टपोन करने का भी फैसला लिया है। इन फैसलों से जुड़े सभी नोटिस मंगलवार देर रात जारी किए गए हैं।

JSSC CGL विवाद के बीच नवनियुक्त कर्मचारियों की मांग है कि उनकी नियुक्तियों की अलग-अलग जांच की जाए। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच के सभी चयनित कर्मचारियों की नौकरी खत्म न की जाए।

अनिल रजक की कहानी ने बढ़ाई चिंता

अनिल रजक की कहानी इस पूरे विवाद में नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों की चिंता को सामने लाती है। पिता के निधन के बाद ऑटो चलाकर परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। बोलने में परेशानी के बावजूद उन्होंने परीक्षा की तैयारी की और चयन हासिल किया।

मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उनकी सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ था। करीब सात महीने तक नौकरी करने के बाद अब परीक्षा रद्द होने के फैसले ने उनकी स्थिति बदल दी है।

उनका कहना है कि यदि उन पर किसी तरह की गड़बड़ी का आरोप है तो जांच की जाए। वह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना उनकी बात सुने नौकरी खत्म किए जाने को वह अन्याय मानते हैं।

आगे क्या चाहते हैं कर्मचारी?

प्रदर्शन कर रहे नवनियुक्त कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जाए। उनका कहना है कि परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता की जांच होनी चाहिए, लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है, उन्हें सामूहिक रूप से सजा नहीं मिलनी चाहिए।

अनिल रजक भी सरकार से यही अपील कर रहे हैं कि उनकी बात सुनी जाए और उनके मामले में निष्पक्ष जांच की जाए। उनका सवाल है कि अगर उन्होंने कोई गलती नहीं की तो उनकी नौकरी क्यों जाए?

सरकार के फैसले से बढ़ी नियुक्त कर्मचारियों की चिंता

JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद नवनियुक्त कर्मचारियों के सामने नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। अनिल रजक का मामला इसी चिंता को भावनात्मक रूप से सामने रखता है।

एक तरफ सरकार ने परीक्षाओं की जांच और रद्द करने से जुड़े कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर नियुक्त कर्मचारी व्यक्तिगत जांच की मांग कर रहे हैं। अब इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को लेकर क्या फैसला होता है। (Expose India)

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