एलपीजी घाटा और ईंधन संकट के बीच सरकार ने उठाए आर्थिक संतुलन के कदम, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली/अमर भारती। घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए कदमों के बावजूद सरकारी क्षेत्र की आयल मार्केटिंग कंपनियां वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। हर घरेलू एलपीजी सिलिंडर पर उन्हें लगभग 700 रुपये का घाटा हो रहा है।

प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने क्या बताया?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आवश्यकतानुसार आयात की व्यवस्था करना शामिल है। उन्होंने कहा कि एलपीजी की मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए घरेलू उत्पादन में वृद्धि की गई है।

भारत के पास नहीं होगी तेल और गैस की कमी

सुजाता शर्मा ने यह भी बताया कि पिछले तीन दिनों में 1.43 करोड़ एलपीजी सिलिंडर वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है और देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के लिए मूलप्य किए निर्धारित

आईएएनएस के अनुसार, सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) का मूल्य अगले तीन सालों के लिए 86.32 रुपये प्रति लीटर तय कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हुई कीमतों की वृद्धि के बीच एयरलाइनों को आर्थिक रूप से स्थिर बनाए रखना और यात्रियों के लिए हवाई टिकटों को किफायती बनाए रखना है।

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