
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने शोध, नवाचार और अकादमिक गतिविधियों को वैश्विक सतत विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी के आदेशानुसार विश्वविद्यालय में शोध प्रकाशनों एवं अकादमिक कार्यों में सतत विकास लक्ष्यों अर्थात सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स से संबंधित कीवर्ड्स को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को अधिक प्रभावी, समाजोपयोगी, वैश्विक रूप से प्रासंगिक तथा आसानी से खोजे जाने योग्य बनाना है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में 2030 एजेंडा के अंतर्गत 17 सतत विकास लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। इन लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन, भुखमरी की समाप्ति, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा, सम्मानजनक कार्य एवं आर्थिक विकास, नवाचार, असमानताओं में कमी, सतत शहर, जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता संरक्षण, न्यायपूर्ण संस्थान तथा वैश्विक साझेदारी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के सतत विकास लक्ष्य प्रकोष्ठ द्वारा विभिन्न विषयों और शोध क्षेत्रों से संबंधित 335 एसडीजी-उन्मुख कीवर्ड्स की विस्तृत सूची तैयार की गई है। इस सूची में पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, स्वच्छ ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, समावेशी विकास, जल संसाधन प्रबंधन, सतत कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, उद्यमिता, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित वित्त, ग्रामीण आजीविका, शहरी विकास और नीति-निर्माण जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित हैं।
इस संबंध में विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, निदेशकों, समन्वयकों एवं प्रभारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने-अपने विभागों और संस्थानों के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को शोध कार्यों में उपयुक्त एसडीजी-संबंधित कीवर्ड्स का प्रयोग करने हेतु निर्देशित करें। इन कीवर्ड्स को थीसिस, शोध-पत्र, लेख, शोध-प्रबंध, लघु परियोजनाओं, शोध परियोजनाओं, सम्मेलनों तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों में सम्मिलित किया जाएगा।
इस पहल से विश्वविद्यालय में हो रहे शोध को 17 सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप अधिक स्पष्ट दिशा मिलेगी। विभिन्न विभागों, संकायों और शोध क्षेत्रों में हो रहे कार्यों को एसडीजी के व्यापक वैश्विक ढांचे से जोड़ने से शोध की विषयगत प्रासंगिकता बढ़ेगी और यह स्पष्ट रूप से सामने आएगा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक योगदान समाज, पर्यावरण, नीति, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और समावेशी विकास जैसे क्षेत्रों में किस प्रकार प्रभावी भूमिका निभा रहा है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि आज के समय में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान-सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, पर्यावरण और भविष्य की चुनौतियों के समाधान में सक्रिय योगदान देना भी उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व है। सतत विकास लक्ष्यों से शोध को जोड़ने से हमारे शोधार्थियों और शिक्षकों का कार्य राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं के साथ अधिक स्पष्ट रूप से जुड़ सकेगा। यह पहल लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध की दृश्यता, प्रासंगिकता और सामाजिक उपयोगिता को और सुदृढ़ करेगी।”
एसडीजी-संबंधित कीवर्ड्स के व्यवस्थित प्रयोग से शोध-पत्रों की साइटेशन में विजिबिलिटी बढ़ेगी, जिससे विश्वविद्यालय के शोध कार्यों की खोज, संदर्भन और उपयोगिता में वृद्धि होगी। इसका सकारात्मक प्रभाव विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, अकादमिक प्रतिष्ठा और वैश्विक पहचान पर पड़ेगा। यह पहल लखनऊ विश्वविद्यालय को एसडीजी-आधारित शोध के क्षेत्र में एक प्रभावी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।