रेडियो पर स्थानीय बोली में कृषि कार्यक्रम बंद, अब 60 केंद्रों से बनेगा ‘किसान वाणी’


मथुरा। आकाशवाणी महानिदेशालय ने कृषि कार्यक्रमों के प्रसारण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 1 अगस्त से नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब देशभर के 96 आकाशवाणी केंद्रों की बजाय केवल 60 केंद्र ही ‘किसान वाणी’ कार्यक्रम तैयार करेंगे, जबकि बाकी सभी केंद्र इन्हीं कार्यक्रमों का रिले प्रसारण करेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार देश के 203 प्राइमरी चैनल, लोकल रेडियो स्टेशन, 42 विविध भारती केंद्र और 4 मेट्रो रेडियो स्टेशन इन्हीं चयनित केंद्रों से तैयार कार्यक्रमों का प्रसारण करेंगे। इस संबंध में आकाशवाणी महानिदेशालय ने पहले ही सभी केंद्रों को उपग्रह संदेश के माध्यम से निर्देश जारी कर दिए थे, जिनका अनुपालन 1 अगस्त से शुरू हो गया है।
मथुरा आकाशवाणी केंद्र से शनिवार, मंगलवार और गुरुवार को प्रसारित होने वाला ब्रज भाषा का ‘किसान वाणी’ कार्यक्रम अब स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं होगा। इसकी जगह यह कार्यक्रम लखनऊ केंद्र में तैयार किया जाएगा और वहीं से मथुरा सहित संबंधित केंद्रों पर प्रसारित होगा।
इस फैसले को लेकर रेडियो और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में चिंता जताई जा रही है। उनका कहना है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अलग-अलग राज्यों और जिलों की जलवायु, मिट्टी, फसलें और खेती की परिस्थितियां भिन्न हैं। किसानों तक प्रभावी जानकारी पहुंचाने के लिए स्थानीय बोली और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नई व्यवस्था से स्थानीय जरूरतों और बोलियों पर आधारित कृषि सलाह सीमित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में अब 13 आकाशवाणी केंद्रों के लिए लखनऊ, बरेली और वाराणसी केंद्र कार्यक्रम तैयार करेंगे। इसी प्रकार उत्तराखंड के चार केंद्रों के लिए केवल देहरादून केंद्र से कार्यक्रमों का निर्माण होगा।
शहरी श्रोताओं के लिए किचन गार्डनिंग कार्यक्रम
नई नीति के तहत 42 विविध भारती और 4 मेट्रो रेडियो स्टेशनों के श्रोताओं को सप्ताह में एक दिन किचन गार्डनिंग से जुड़ा विशेष कार्यक्रम भी सुनने को मिलेगा, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में घरेलू बागवानी को बढ़ावा देना है।
ब्रज भाषा के कार्यक्रम को बचाने की मांग नहीं हुई पूरी
मथुरा-वृंदावन केंद्र से ब्रज भाषा में प्रसारित होने वाले किसान वाणी कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर जारी रखने की मांग पहले भी उठाई गई थी। इसके लिए सांसद हेमा मालिनी, राज्यसभा सांसद चौधरी तेजवीर सिंह तथा क्षेत्र के विधायकों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र लिखकर ब्रज भाषा के कार्यक्रम बंद न करने का आग्रह किया था। हालांकि, नई नीति में उनकी मांग को शामिल नहीं किया गया।