
बाराबंकी। कोतवाली टिकैतनगर क्षेत्र के ग्राम खेतासरांय निवासी रूखसाना पत्नी मोहम्मद जाबिर बीते दो माह से अपने घर में हुई लाखों रुपये की चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है, जबकि अब तक न मुकदमा दर्ज हुआ और न ही चोरी गए सामान की बरामदगी हो सकी।
रूखसाना के अनुसार 17 अप्रैल की रात अज्ञात चोर उनके घर में घुसकर लाखों रुपये के जेवरात, कपड़े तथा करीब 1.10 लाख रुपये नकद चोरी कर ले गए थे। घटना की जानकारी होने पर उन्होंने स्थानीय पुलिस चौकी और थाना टिकैतनगर में लिखित शिकायत दी। पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन समय बीतने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पीड़िता का कहना है कि 3 मई को गांव में आयोजित एक शादी समारोह में उनकी बेटी ने गांव निवासी गल्ले की दो बेटियों के हाथों में ऐसी सोने की अंगूठियां देखीं, जिन्हें वह अपने घर से चोरी हुई अंगूठियों के रूप में पहचानती है। सूचना मिलने पर जब रूखसाना मौके पर पहुंचीं तो दोनों युवतियां वहां से चली गईं। इसके बाद उन्होंने पुनः पुलिस को लिखित सूचना देकर संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई और चोरी गए जेवरों की बरामदगी की मांग की, लेकिन पुलिस ने केवल जांच का भरोसा दिया।
रूखसाना ने पुलिस अधीक्षक समेत अन्य उच्चाधिकारियों को भी शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस जानबूझकर मामले को दबाने और आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
जनसुनवाई पोर्टल की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
पीड़िता ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने पोर्टल पर गलत आख्या लगाकर मामले को भटकाने का प्रयास किया। शिकायत में उन्होंने गांव निवासी गल्ले पर संदेह जताया था, जबकि पुलिस रिपोर्ट में जांच चेतई के घर की दर्शा दी गई। रूखसाना का कहना है कि चेतई की मौत करीब एक वर्ष पहले हो चुकी है, जबकि गल्ले गांव में मौजूद हैं।
वहीं, इस संबंध में थाना प्रभारी टिकैतनगर का कहना है कि जांच गल्ले के घर की ही की गई थी, लेकिन कंप्यूटर टाइपिंग के दौरान नाम गलत दर्ज हो गया। उन्होंने इसे मात्र प्रिंटिंग मिस्टेक बताया।
फिलहाल दो माह बीत जाने के बाद भी चोरी का मुकदमा दर्ज न होने और मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने से पीड़िता न्याय की आस में अधिकारियों की चौखटों पर भटकने को मजबूर है।