PoK के रावलकोट में चुनाव विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गोलीबारी के दावे। JAAC ने कई लोगों के मारे जाने का दावा किया और अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग की।

नई दिल्ली/अमर भारती। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में मंगलवार को भी हालात तनावपूर्ण बने रहे। चुनावों के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। स्थानीय संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में कई लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर अलग आंकड़े या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
JAAC ने 14 लोगों की मौत का किया दावा
JAAC के प्रमुख सदस्यों में शामिल इम्तियाज असलम ने दावा किया कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 युवाओं की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर बल प्रयोग किया गया। इम्तियाज असलम ने विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से अपील की कि वे पाकिस्तानी दूतावासों, संयुक्त राष्ट्र (UN) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के बाहर विरोध प्रदर्शन कर इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाएं।
रावलकोट के ड्रेक ईदगाह इलाके में बढ़ा तनाव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रावलकोट के ड्रेक ईदगाह क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग चुनावों के बहिष्कार के समर्थन में एकत्र हुए थे। इसी दौरान हालात बिगड़ गए और सुरक्षा बलों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। स्थानीय कार्यकर्ताओं और JAAC का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना, पंजाब रेंजर्स और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर असली गोलियां चलाईं। साथ ही लंबी दूरी तक मार करने वाले आंसू गैस के गोले दागे गए और रणनीतिक स्थानों पर स्नाइपर्स भी तैनात किए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
संचार सेवाएं बाधित करने का भी आरोप
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्होंने रावलकोट में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाकर सुरक्षा बलों की आवाजाही रोकने की कोशिश की। वहीं स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हालात नियंत्रित करने के लिए मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवाएं और कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित कर दी। इन दावों पर भी पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अंतरराष्ट्रीय दखल की उठी मांग
हिंसा के बाद JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। फिलहाल रावलकोट और आसपास के इलाकों में तनाव बना हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि विरोध प्रदर्शन जारी रहने की बात कही जा रही है। स्थिति को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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