धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने अब 3 बड़ी चुनौतियां

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है।
यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन कई हफ्तों से देश की राजनीति के केंद्र में था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को मिली नई जिम्मेदारी
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
हालांकि, प्रह्लाद जोशी के पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी बनी रहेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल वह अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी संभालेंगे।
यह बदलाव NEET-UG परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच हुआ है। शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कई अहम चुनौतियां होंगी।
3 मई से शुरू हुआ NEET विवाद कैसे बना बड़ा छात्र आंदोलन?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई, जब NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए। छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।

शुरुआत में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना, लेकिन धीरे-धीरे छात्रों का असंतोष बड़े आंदोलन में बदल गया। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता हो, कथित पेपर लीक मामलों की जांच की जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
इसी दौरान 15 मई को एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ। उन्होंने कुछ लोगों के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी आम युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।
28 जून को सोनम वांगचुक के जुड़ने से आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
सोनम वांगचुक ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। लगातार अनशन के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
सरकार से बातचीत और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया। हालांकि, उनके अनशन से आंदोलन को देशभर में और अधिक चर्चा मिली।
20 जुलाई को संसद मार्च और 22 जुलाई को राहुल गांधी का प्रदर्शन
20 जुलाई 2026 को CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया। इस दौरान झड़प हुई और आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।

इसके बाद विपक्ष ने भी NEET मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। 22 जुलाई को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग रखी।
राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते हुए शिक्षा मंत्री को हटाने, छात्रों पर कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और छात्रों से माफी की मांग उठाई।
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, फिर हुआ बड़ा ऐलान
आखिरकार 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।
इसके बाद राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी। इस तरह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी के पास आ गई है।
CJP ने भी इसके बाद अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। इस घटनाक्रम को छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी के सामने अब 3 बड़ी चुनौतियां
शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।

1. छात्रों का भरोसा बहाल करना
NEET-UG विवाद और लंबे छात्र आंदोलन के बाद सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा वापस हासिल करना होगी। छात्रों की शिकायतों और मांगों पर सरकार को भरोसेमंद समाधान देना होगा।
2. परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित धांधली रोकना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रों की मांग रही है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाए।
3. आंदोलन के बाद संवाद कायम करना
लंबे आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच संवाद बनाए रखना भी अहम होगा। प्रह्लाद जोशी के सामने आंदोलनरत युवाओं को आश्वस्त करने और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा कायम करने की चुनौती होगी।
प्रह्लाद जोशी की चुनौतियाँ
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई 2026 को प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। यह फैसला 3 मई से शुरू हुए NEET-UG विवाद, 28 जून को सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़ने, 20 जुलाई के संसद मार्च और 22 जुलाई के राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद आया। अब प्रह्लाद जोशी के सामने छात्रों का भरोसा बहाल करने, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और आंदोलन के बाद संवाद कायम करने की 3 बड़ी चुनौतियां होंगी।
प्रह्लाद जोशी की राजनीतिक यात्रा
प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को हुआ। पेशे से व्यवसायी रहे जोशी की राजनीतिक शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में हुई। उन्होंने 1992-94 में हुबली (कर्नाटक) के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वे आरएसएस और भाजपा के कार्यकर्ताओं में चर्चित हुए।

इसके बाद उन्हें धारवाड़ जिले में भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। 2006 से 2013 तक वे कर्नाटक भाजपा के महासचिव रहे और 2013-2014 में कर्नाटक भाजपा के राज्य अध्यक्ष का पद संभाला।
संसदीय और केंद्रीय मंत्री पद
प्रह्लाद जोशी 2004 से लगातार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने जा रहे हैं — यह उनकी पांचवीं जीत (2024) है। 2014 में वे पहली बार केंद्रीय मंत्री नहीं बने, लेकिन 30 मई 2019 को मोदी सरकार 2.0 में कैबिनेट मंत्री बने और संसदीय कार्य, कोयला तथा खान मंत्रालय संभाले। 2024 के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय दिए गए।
25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) की जिम्मेदारी भी उनको सौंपी गई।प्रह्लाद जोशी कर्नाटक में भाजपा के मजबूत चेहरे माने जाते हैं और केंद्र में ऊर्जा, खनन तथा अब शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। (Expose India)
यह भी पढ़ें
छात्रों की बड़ी जीत के बाद राहुल गांधी का बड़ा वार, 3 मुद्दों पर गृहमंत्री अमित शाह से मांगा हिसाब