
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ का तृतीय दीक्षांत समारोह सोमवार को शैक्षणिक शोभायात्रा के साथ भव्य रूप से आयोजित हुआ। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम. सिंह द्वारा दीक्षांत समारोह के शुभारंभ की अनुमति का अनुरोध किया गया, जिसके बाद औपचारिक रूप से समारोह का उद्घाटन किया गया। संस्थान के उपाध्यक्ष अमित कुमार घोष तथा उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण) ने स्वागत भाषण देते हुए विद्यार्थियों को बधाई दी और चिकित्सा शिक्षा को समाज निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सीएम. सिंह ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उनके सामने वास्तविक जीवन की चुनौतियां होंगी, जहां मरीजों की उम्मीद, चिंता और भरोसा उनसे जुड़ा होगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा की सबसे बड़ी सफलता किसी रिपोर्ट में नहीं बल्कि मरीज को मिलने वाली राहत में दिखाई देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान के साथ मानवीय व्यवहार और संवेदनशीलता को भी जीवन का हिस्सा बनाएं, क्योंकि लोग डॉक्टरों को उनके ज्ञान से अधिक उनके व्यवहार के लिए याद रखते हैं।
संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान उपलब्धियों का प्रस्तुत किया गया ब्यौरा
निदेशक ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में स्थापित संस्थान ने 2009 में ओपीडी सेवाएं शुरू कीं और 2018 में विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त किया। वर्तमान में संस्थान में प्रतिवर्ष 200 एमबीबीएस, 40 बीएससी नर्सिंग, 107 एमडी-एमएस, 36 डीएम-एमसीएच, 6 एमएससी (न्यूक्लियर मेडिसिन), 4 डीएनबी, 2 एफएनबी, 76 पैरामेडिकल डिप्लोमा तथा 35 पीएचडी शोधार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। संस्थान के 34 विभागों में विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा आगामी सत्र में एफएनबी और डीएनबी की सात अतिरिक्त सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में संस्थान में 148 नई अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गईं, 20 क्लीनिकल ट्रायल प्रारंभ हुए, एमबीबीएस छात्रों द्वारा आठ शोध परियोजनाएं संचालित की गईं तथा संस्थान के नाम तीन पेटेंट भी दर्ज हुए हैं। यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश में लेड पॉइजनिंग के आकलन की महत्वपूर्ण परियोजना संचालित की जा रही है, जिसका विस्तार सभी जनपदों तक किए जाने की योजना है। इसके साथ ही नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘डॉ. आरएमएलआईएमएस फाउंडेशन’ के रूप में इन्क्यूबेशन सेल की स्थापना भी की गई है।
रोगी सेवाओं में नए मानक स्थापित कर रहा संस्थान
प्रगति रिपोर्ट के अनुसार बीते एक वर्ष में संस्थान ने नौ लाख से अधिक मरीजों को ओपीडी सेवाएं प्रदान कीं, जबकि 78 हजार से अधिक मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। 1.71 लाख से अधिक मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं तथा 39 हजार से अधिक सर्जरी और लगभग सात हजार सुरक्षित प्रसव संपन्न कराए गए।
संस्थान ने रोगी-केंद्रित कई अभिनव पहलें भी शुरू की हैं। इनमें ईको, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों की ‘उसी दिन डायग्नोस्टिक सेवा’, भर्ती मरीजों के लिए बेडसाइड दवा वितरण व्यवस्था, तत्काल उपचार के लिए मिसलेनियस ड्रग्स सुविधा, इमरजेंसी मरीजों के लिए पोर्टर सिस्टम, 24×7 ग्रीन ओपीडी, टेली फॉलो-अप सेवा और क्यूआर कोड आधारित शिकायत निवारण प्रणाली शामिल हैं। ‘हृदय सेतु’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 10 जनपदों में 24 हजार से अधिक ईसीजी परीक्षण किए जा चुके हैं तथा सैकड़ों गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया है।
अंग प्रत्यारोपण, रोबोटिक सर्जरी और न्यूरोसाइंस में नई उपलब्धियां
संस्थान में ट्रांसप्लांट सेंटर का निर्माण पूरा हो चुका है, जहां अब तक 200 किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। शीघ्र ही थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट और लिवर ट्रांसप्लांट सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के माध्यम से 350 से अधिक रोबोटिक सर्जरियां सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। इसके अलावा कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए आई बैंक की स्थापना की जा रही है और अगस्त 2026 से इसकी शुरुआत प्रस्तावित है।
न्यूरोसाइंस क्षेत्र में भी संस्थान ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पहली बार पार्किंसन रोग के लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। लगभग 150 बेड वाले न्यूरोसाइंस सेंटर में अब तक 8,700 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। साथ ही प्रदेश का पहला गामा नाइफ सिस्टम भी जल्द शुरू किया जाएगा।
1010 बेड के नए अस्पताल सहित कई बड़ी परियोजनाएं निर्माणाधीन
संस्थान के शहीद पथ परिसर में 1010 बेड क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल को प्रदेश सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त 100 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर, 888 बेड का छात्रावास, आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल अकादमिक भवन सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। हाल ही में 500 बेड क्षमता वाले पीआरए भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन तथा नए डायग्नोस्टिक ब्लॉक का लोकार्पण भी किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के निर्देश पर 350 बेड क्षमता वाले लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना के लिए अतिरिक्त भूमि भी उपलब्ध कराई गई है।
राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री और मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को दिया सेवा का संदेश
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाध्यक्षा ने ऑनलाइन संबोधन के दौरान विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य संबंधी आशाएं अब उनसे जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के हित में समर्पित हो। चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व है।
वहीं राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्वस्थ और सकारात्मक रहने का संदेश दिया। वहीं उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री बृजेश पाठक ने सभी डिग्रीधारकों को शुभकामनाएं देते हुए आश्वस्त किया कि सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) वेदप्रकाश मिश्रा ने कहा कि नियति ने युवा चिकित्सकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे उन्हें पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना होगा।
26 पदकों का वितरण, उत्कृष्ट शिक्षक भी सम्मानित
समारोह के दौरान डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग और एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन के विद्यार्थियों को उपाधियां, पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। चांसलर्स मेडल, डायरेक्टर्स मेडल सहित कुल 26 पदक वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. राजन भटनागर को उत्कृष्ट अध्यापक सम्मान से नवाजा गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक सरोकारों से सजा समारोह
दीक्षांत समारोह में एमबीबीएस विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत और समूह अभिनय की प्रस्तुति दी। संस्थान द्वारा गोद लिए गए गांवों के छह स्कूली बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर नाट्य मंचन कर उपस्थित लोगों को जागरूकता का संदेश दिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नौ विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास से जुड़ी विशेष पहल के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सम्मानित कर किट वितरित की गई। सामाजिक संस्था ‘जनमंच’ द्वारा पुस्तक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके तहत कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को 100 पुस्तकें प्रदान कर अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।