
जरवल रोड, बहराइच। बाराबंकी-बहराइच-गोंडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाघरा नदी के ऊपर स्थित महत्वपूर्ण घाघरा घाट (संजय सेतु) पुल का मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सोमवार से छोटे वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया गया। एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत कुमार मौर्य एवं इंजीनियर विपुल श्रीवास्तव की मौजूदगी में पुल के दोनों ओर लगाए गए बैरिकेडिंग और गेट हटाकर यातायात बहाल कराया गया।
पुल खुलते ही स्थानीय लोगों, कार और मोटरसाइकिल चालकों सहित अन्य हल्के वाहन चालकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। अब तक पीपा पुल के माध्यम से आवागमन करने वाले लोग सीधे संजय सेतु का उपयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे समय और दूरी दोनों की बचत होगी।
जानकारी के अनुसार पुल का मरम्मत कार्य दो दिन पहले ही पूरा हो गया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की औपचारिक स्वीकृति और आवश्यक प्रक्रियाओं के चलते यातायात बहाल नहीं किया जा सका था। सभी तकनीकी सुधार, सुरक्षा परीक्षण और निरीक्षण पूर्ण होने के बाद सोमवार को छोटे वाहनों के लिए पुल खोल दिया गया।
एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत कुमार मौर्य ने बताया कि फिलहाल मोटरसाइकिल, कार और अन्य हल्के वाहनों के लिए आवागमन शुरू किया गया है। पुल की स्थिति का कुछ दिनों तक परीक्षण और निगरानी करने के बाद भारी वाहनों के संचालन की अनुमति भी दी जाएगी।
थाना प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मरम्मत कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही पुल को यातायात के लिए खोला गया है।
उल्लेखनीय है कि 16 अप्रैल को जिलाधिकारी के निर्देश पर संजय सेतु को मरम्मत कार्य के लिए बंद कर दिया गया था। इस दौरान वैकल्पिक व्यवस्था के तहत घाघरा नदी पर बने पीपा पुल से छोटे वाहनों और स्थानीय यातायात का संचालन कराया जा रहा था।
संजय सेतु के पुनः खुलने से बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, श्रावस्ती और बलरामपुर जनपदों के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली है। पीपा पुल के मुकाबले अब यात्रा में कम समय लगेगा और आवागमन अधिक सुगम होगा।
हालांकि भारी वाहन चालकों और वाहन स्वामियों में निराशा भी देखी जा रही है। ट्रक, डंपर, कंटेनर और अन्य भारी वाहनों के संचालकों को उम्मीद थी कि पुल खुलते ही सभी प्रकार के वाहनों का संचालन एक साथ शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल केवल छोटे वाहनों को ही अनुमति मिलने से उन्हें अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा।