खामोशी से बढ़ रहे परमाणु जखीरे… क्या दुनिया फिर विनाश के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है? भारत ने भी लगाई छलांग

SIPRI Report 2026, Nuclear Weapons, India Nuclear Arsenal, Pakistan Nuclear Weapons
SIPRI Report 2026, Nuclear Weapons, India Nuclear Arsenal, Pakistan Nuclear Weapons

नई दिल्ली/अमर भारती। दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की नई दौड़ की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महाशक्तियों के बीच अविश्वास और क्षेत्रीय संघर्षों ने देशों को अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इसी बीच रक्षा और सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ ने दुनिया के सामने चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

भारत ने बढ़ाई रणनीतिक ताकत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का परमाणु शस्त्रागार लगातार मजबूत हो रहा है। वर्ष 2025 में भारत के पास 180 परमाणु वॉरहेड्स थे, जो 2026 में बढ़कर 190 हो गए हैं। इस बढ़ोतरी के साथ भारत ने अपने पड़ोसी पाकिस्तान पर स्पष्ट बढ़त बना ली है। पाकिस्तान का परमाणु भंडार इस अवधि में 170 वॉरहेड्स पर स्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत केवल संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि अपनी परमाणु क्षमता के आधुनिकीकरण और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भारत अब शांति काल में भी कुछ परमाणु हथियारों को अधिक सक्रिय स्थिति में रखने की क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे किसी भी आपात परिस्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके।

पाकिस्तान और भारत दोनों कर रहे आधुनिकीकरण

हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु हथियारों तथा मिसाइल प्रणालियों को आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या और तकनीकी क्षमता के मामले में भारत की बढ़त स्पष्ट दिखाई दे रही है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव ने सुरक्षा रणनीतियों को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

दुनिया में कितने हैं परमाणु हथियार?

सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 तक दुनिया में कुल 12,187 परमाणु वॉरहेड्स मौजूद थे। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी कम जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है। कई देश पुराने हथियारों को हटाने की प्रक्रिया धीमी कर रहे हैं और नए तथा अधिक घातक हथियारों को तेजी से विकसित कर रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 सैन्य भंडार में सक्रिय उपयोग के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से करीब 4,012 वॉरहेड्स मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर तैनात हैं, जबकि 2,100 से अधिक परमाणु हथियार हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

रूस और अमेरिका अब भी सबसे आगे

परमाणु शक्ति के मामले में रूस और अमेरिका का दबदबा आज भी कायम है।

  • रूस – 5,420 वॉरहेड्स
  • अमेरिका – 5,042 वॉरहेड्स
  • चीन – 620 वॉरहेड्स
  • फ्रांस – 370 वॉरहेड्स
  • ब्रिटेन – 225 वॉरहेड्स
  • भारत – 190 वॉरहेड्स
  • पाकिस्तान – 170 वॉरहेड्स
  • इजरायल – 90 वॉरहेड्स (अनुमानित)
  • उत्तर कोरिया – 60 वॉरहेड्स

रिपोर्ट के अनुसार, चीन और उत्तर कोरिया सबसे तेजी से अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहे हैं, जबकि फ्रांस ने भी इस वर्ष अपने शस्त्रागार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा से बढ़ी वैश्विक चिंता

सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता दुनिया को एक खतरनाक दिशा में ले जा रही है। हथियार नियंत्रण समझौतों का कमजोर पड़ना, नई सैन्य तकनीकों का विकास और महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी तैनाती दोनों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे में दुनिया एक ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां किसी भी छोटी गलती या गलत आकलन के बड़े वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

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