
जौनपुर (मुंगराबादशाहपुर)। सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता की चाह अब सामाजिक मर्यादाओं पर भारी पड़ने लगी है। लाइक्स, व्यूज और शेयर की अंधी दौड़ में कुछ लोग किसी की निजी जिंदगी और प्रतिष्ठा को निशाना बनाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। पत्रकार विक्की गुप्ता ने सोशल मीडिया पर महिलाओं के चरित्र-हनन की बढ़ती प्रवृत्ति को समाज के लिए गंभीर खतरा बताया है।
विक्की गुप्ता के मुताबिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल अब कई बार चरित्र हनन और मानसिक प्रताड़ना के लिए किया जा रहा है। निजी रंजिश, जातिगत द्वेष अथवा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए महिलाओं की तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल कर अमर्यादित आरोप लगाए जाने के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर निशाना बनने वाली महिला कोई छात्रा, अध्यापिका, पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी या साधारण गृहिणी हो सकती है, लेकिन उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक शांति किसी भी व्यक्ति के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। बिना तथ्य जांचे किसी महिला के खिलाफ आरोप लगाना केवल एक पोस्ट या वीडियो तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर उसके परिवार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है।
गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री प्रसारित करने वालों को यह समझना होगा कि स्क्रीन के पीछे मौजूद व्यक्ति भी भावनाओं और सम्मान वाला इंसान है। किसी की बहन, बेटी, पत्नी या मां की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रूप से चोट पहुंचाना मनोरंजन या लोकप्रियता का माध्यम नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी का अभाव और कार्रवाई में देरी ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पुलिस-प्रशासन को शिकायतों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने की जरूरत है।
विक्की गुप्ता ने युवाओं से अपील की कि सोशल मीडिया को नफरत, अफवाह और चरित्र-हनन का हथियार बनाने के बजाय शिक्षा, रचनात्मकता और सकारात्मक संवाद का माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि लाइक्स और व्यूज कुछ समय की लोकप्रियता दे सकते हैं, लेकिन किसी की प्रतिष्ठा छीनकर हासिल की गई लोकप्रियता समाज के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नारी सम्मान की रक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और प्रत्येक उपयोगकर्ता की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय रहते डिजिटल अराजकता पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसका असर सामाजिक ताने-बाने पर और गंभीर रूप से पड़ सकता है।