गोमती नगर में “स्याल्दे बिखौती मेला” का भव्य आयोजन, उत्तराखण्डी संस्कृति की झलक से गूंजा परिसर

लखनऊ। श्री रामलीला समिति, शाखा पर्वतीय महापरिषद गोमती नगर के तत्वावधान में 14 अप्रैल 2026 को पर्वतीय महापरिषद भवन, गोमती नगर में ऐतिहासिक “स्याल्दे बिखौती मेला” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डवासियों सहित स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गणेश चन्द्र जोशी (अध्यक्ष, पर्वतीय महापरिषद) एवं विशिष्ट अतिथि महेन्द्र सिंह रावत (महासचिव) रहे। अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत शाखा अध्यक्ष गोविन्द सिंह बोरा, महासचिव रमेश चन्द्र उपाध्याय तथा अन्य पदाधिकारियों द्वारा किया गया। संरक्षक टी.डी. पपने और हरीश कांडपाल ने मुख्य अतिथि को बुके भेंट कर सम्मानित किया, वहीं अन्य अतिथियों को भी समिति सदस्यों द्वारा पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वंदना गीत से हुआ, जिसके बाद उत्तराखण्ड की पारंपरिक लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक “झोड़ा” नृत्य और लोक गायन रहा। हारमोनियम पर नरेन्द्र सिंह फर्त्याल के साथ कलाकारों ने लोकगीत प्रस्तुत किए, जिन पर लगभग 250 से अधिक महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने सामूहिक झोड़ा नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुराने और नए लोकगीतों पर थिरकते कलाकारों ने पहाड़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, साहित्यकार, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर के.एन. उपाध्याय, ज्ञान पंत, के.एन. पांडेय, महेन्द्र पंत, के.सी. पंत, के.एस. रावत, धन सिंह मेहता, पुष्कर सिंह नयाल, जितेन्द्र उपाध्याय, कमल सिंह नेगी, बलवंत वाणगी, नवीन जोशी, वीरेन्द्र आर्या, चित्रा कांडपाल, सुमन रावत, राधिका बोरा, विद्याधर पाठक सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
मेले के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए आयोजकों ने बताया कि “स्याल्दे बिखौती मेला” मूल रूप से उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट क्षेत्र में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध पारंपरिक मेला है, जो वैशाख माह में मनाया जाता है। यह मेला विभाण्डेश्वर मंदिर एवं द्वाराहाट बाजार में दो चरणों में आयोजित होता है और इसकी तैयारियां एक माह पूर्व से ही शुरू हो जाती हैं। चैत्र मास की फूलदेई संक्रांति से ही गांवों में झोड़ा गायन और उत्सव का माहौल बनना शुरू हो जाता है।
गोमती नगर में आयोजित इस मेले ने न केवल उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवित रखा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी कार्य किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।