वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी: झारखंड युवाओं से 20-20 हजार रूपए जमा कराए गए, नौकरा का झांसा देकर लाए गए युवक-युवतियां

डिजिटल डेस्क, अमर भारती। वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र में गुरुवार को साइबर पुलिस और स्थानीय पुलिस ने एक कथित नेटवर्किंग कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 250 युवक-युवतियों को मुक्त कराया। पुलिस ने मौके से 20 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिहार और झारखंड के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर वाराणसी बुलाया गया था और उनसे 20-20 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रोहनिया के औढ़े गांव में हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, रोहनिया थाना क्षेत्र के औढ़े गांव स्थित एक किराये के भवन में कथित तौर पर महादेव इंटरप्राइजेज और आरएचआई के नाम से नेटवर्किंग गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। सूचना मिलने पर साइबर थाना और रोहनिया पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी की इस कार्रवाई के दौरान भवन में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां मौजूद मिले, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।
मुक्त कराए गए अधिकांश युवक-युवतियां बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों के बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मौके से 20 लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है ताकि पूरे नेटवर्क और उसके संचालन की जानकारी जुटाई जा सके।

नौकरी का झांसा देकर जमा कराए जाते थे 20 हजार रुपये
एसीपी (साइबर अपराध) विदुष सक्सेना के अनुसार, वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि संस्था में शामिल होने वाले युवाओं से 20-20 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। इसके बदले उन्हें साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और अन्य घरेलू उत्पाद दिए जाते थे।
इसके बाद युवाओं को निर्देश दिया जाता था कि वे नेटवर्किंग मॉडल के तहत नए लोगों को जोड़ें। पुलिस यह जांच कर रही है कि संस्था का संचालन वैध प्रत्यक्ष बिक्री (डायरेक्ट सेलिंग) के नियमों के अनुरूप था या फिर यह कथित तौर पर अवैध तरीके से लोगों से धन जुटाने का माध्यम बनाया गया था।

मुक्त कराए गए युवाओं ने लगाए गंभीर आरोप
वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी में पुलिस कार्रवाई के दौरान मुक्त कराए गए कई युवक-युवतियों ने आरोप लगाया कि उन्हें परिसर से बाहर आने-जाने की पूरी स्वतंत्रता नहीं थी। कुछ ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर उन पर दबाव बनाया जाता था।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
लंबे समय से चल रही गतिविधियों पर उठे सवाल
वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी मामले के सामने आने के बाद कई अहम सवाल भी खड़े हो गए हैं। यदि एक ही परिसर में लंबे समय से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रह रहे थे और वहां कथित नेटवर्किंग गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या आसपास के लोगों ने कभी शिकायत नहीं की, या यदि शिकायत हुई तो उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस की मिलीभगत का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं
फिलहाल इस मामले में ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि पुलिस या किसी अन्य सरकारी अधिकारी की मिलीभगत थी। इसलिए वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी की जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

हिरासत में लिए गए लोगों से जारी है पूछताछ
पुलिस हिरासत में लिए गए 20 लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संस्था का संचालन कौन कर रहा था, अब तक कितने लोगों को जोड़ा गया, कितनी धनराशि एकत्र की गई और इस नेटवर्क का दायरा किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
इसके साथ ही पुलिस दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाई जा सके।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि नौकरी, निवेश या नेटवर्किंग के नाम पर किसी भी संस्था को धन देने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच अवश्य करें। किसी भी कंपनी में शामिल होने से पहले उसके पंजीकरण, कार्यप्रणाली और सरकारी नियमों के अनुपालन की जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।
यदि किसी संस्था की गतिविधियां संदिग्ध लगें या नौकरी के नाम पर पहले धन जमा करने की मांग की जाए, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

लंबे समय से नेटवर्किंग पर गंभीर सवाल
वाराणसी नेटवर्किंग कंपनी छापेमारी ने एक बार फिर नौकरी के नाम पर चल रहे कथित नेटवर्किंग और धन वसूली के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अभी तक की जानकारी प्रारंभिक जांच एवं अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। (Expose India)
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