
किरावली। कार्य शिथिलता के आरोप में तहसील में तैनात लेखपाल नेहा शर्मा के निलंबन के बाद स्थानीय लेखपाल संघ ने विरोध तेज कर दिया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल के आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए लेखपालों ने तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जिससे राजस्व कार्य प्रभावित हो गए हैं।
धरना दे रहे लेखपालों का कहना है कि निलंबन की कार्रवाई बिना कारण बताओ नोटिस और बिना जांच के की गई है। उनका आरोप है कि केवल एक शिकायतकर्ता की कथित झूठी शिकायत के आधार पर कार्रवाई कर दी गई, जबकि संबंधित लेखपाल अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद थीं और उनके पास इसके साक्ष्य भी हैं।
धरना स्थल पर पहुंचीं उपजिलाधिकारी दिव्या सिंह और तहसीलदार ने लेखपालों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन संघ ने साफ कहा कि जब तक निलंबन आदेश वापस नहीं लिया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा।
लेखपाल संघ ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में तहसील परिसर में महिला लेखपालों और कर्मचारियों के लिए आवास एवं शौचालय की कमी, विवादित मामलों में उच्चाधिकारियों के सहयोग का अभाव, लंबित वेतन और भत्तों के भुगतान जैसी समस्याएं उठाई गईं।
लेखपालों ने कहा कि मार्च 2026 का वेतन अब तक नहीं मिला है, जबकि वर्ष 2018 से क्रॉप कटिंग मानदेय का भुगतान भी लंबित है। इसके अलावा कुछ लेखपालों के कई महीनों के वेतन रुके होने का आरोप लगाया गया। संघ ने यह भी कहा कि गौशालाओं के लिए भूसे की व्यवस्था जैसे कार्य लेखपालों के जिम्मे डाले जा रहे हैं, जबकि इसके लिए कोई बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है।
धरना स्थल पर तहसील अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह, मनोज रावत, बृजेश भास्कर, नारायण दास, संदीप कुमार, धर्मेंद्र रावत, रामावतार यादव, रॉबिन सिंह, सतीश कुशवाह, दीपक सक्सैना, युवराज सिंह, ज्योति सिंह, मीना कुमारी और वर्तिका फौजदार सहित कई लेखपाल मौजूद रहे।