भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं। पिता और भाई को भी आरोपी बनाया गया है। वायरल आखिरी फेसबुक लाइव को लेकर मामले में नई बहस छिड़ गई है।

नई दिल्ली/अमर भारती। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर जहां परिजन और ग्रामीण फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाकर न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने पूरे घटनाक्रम से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
सोशल मीडिया गतिविधियां बनीं चर्चा का केंद्र
भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर काफी सक्रिय बताया जाता था। वह अक्सर फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बातें लोगों तक पहुंचाता था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े कई वीडियो मौजूद बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में उसने हथियार के साथ कई वीडियो साझा किए थे। कुछ वीडियो में वह पुलिसकर्मियों के साथ बहस करता और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता भी दिखाई दिया था।
आखिरी Facebook Live को लेकर उठ रहे सवाल
घटना वाले दिन भरत ने कथित तौर पर कई फेसबुक लाइव प्रसारण किए। इनमें वह पुलिस कार्रवाई और मौके की स्थिति को दिखाता नजर आया। सबसे अधिक चर्चा उसके आखिरी फेसबुक लाइव की हो रही है। वायरल वीडियो में वह पुलिस से घिरा दिखाई देता है और अंत में अपना पिस्टल जमीन पर फेंकता नजर आता है। इसके तुरंत बाद लाइव प्रसारण बंद हो जाता है। परिजनों का दावा है कि हथियार छोड़ने के बाद भी उसे गोली मारी गई, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई।
पहली एफआईआर में क्या हैं आरोप?
पुलिस द्वारा दर्ज पहली प्राथमिकी में भरत भूषण तिवारी पर अवैध हथियार रखने, पुलिस पर फायरिंग करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि 17 जून को उसे गिरफ्तार करने पहुंची टीम का उसने हथियार के बल पर विरोध किया और कई राउंड गोलियां चलाईं। एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को उसके पास अवैध हथियार होने की जानकारी थी। पुलिस का आरोप है कि दोनों उसे संरक्षण दे रहे थे। इसी आधार पर दोनों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
मुठभेड़ को लेकर आमने-सामने हैं दावे
दूसरी प्राथमिकी कथित मुठभेड़ से जुड़ी है। पुलिस के अनुसार, भरत हथियार लेकर भाग रहा था और पीछा करने के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का दावा है कि सरकारी वाहन के बोनट पर भी गोली लगी थी। कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने गोलीबारी जारी रखी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। दूसरी ओर, परिजन और ग्रामीण इस दावे को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पुलिस के संस्करण पर सवाल खड़े करते हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाए तो घटना की वास्तविकता सामने आ सकती है।
सड़क जाम और प्रदर्शन पर तीसरी एफआईआर
भरत तिवारी की मौत के बाद बिलौटी गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचने पर ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-922) को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। कई घंटों तक चले इस आंदोलन से यातायात प्रभावित रहा। अब पुलिस ने इस मामले में भी तीसरी प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर में बिलौटी पंचायत के मुखिया बलिराम यादव समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 50 से 60 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर सड़क जाम, हंगामा और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए गए हैं।
न्याय की मांग को लेकर निकला कैंडल मार्च
मामले को लेकर आरा शहर में कैंडल मार्च भी निकाला गया। कतीरा मोड़ से शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां और बैनर लेकर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जांच रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें
फिलहाल भरत भूषण तिवारी मामले में दर्ज तीन एफआईआर, मृतक के पिता और भाई को आरोपी बनाए जाने तथा सोशल मीडिया पर वायरल आखिरी फेसबुक लाइव ने पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चित बना दिया है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून सम्मत बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और स्थानीय लोग इसे न्याय की लड़ाई बता रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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