कनिष्ठ लिपिक को कार्यमुक्त न किए जाने पर उठे सवाल, विभागीय कार्यशैली पर चर्चा तेज

रिपोर्ट -पंकज चतुर्वेदी


रामनगर। प्रशासनिक स्थानांतरण आदेश के बावजूद एक कनिष्ठ लिपिक को कार्यमुक्त न किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले को लेकर विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) से संबंधित कनिष्ठ लिपिक मुकेश कुमार पिछले लगभग आठ वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। हाल ही में प्रशासनिक आधार पर उनका स्थानांतरण अमेठी जनपद के लिए किया गया है, लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उन्हें अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
सूत्रों के अनुसार संबंधित कर्मचारी अपने स्थानांतरण को रुकवाने का दावा कर रहा है। चर्चा है कि वह उच्च अधिकारियों से संपर्क में होने की बात कह रहा है और खुद को कार्यमुक्त न किए जाने का भरोसा जता रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि कर्मचारी के कार्यकाल और कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में शिकायतें भी की जा चुकी हैं। हालांकि इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मामले को लेकर जब अधीक्षण अभियंता, अयोध्या मंडल के.के. मिश्रा से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण रोकने जैसी कोई बात नहीं है। कार्यालय स्तर पर कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और यदि अभी तक कर्मचारी कार्यमुक्त नहीं हुआ है तो इसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विभाग स्थानांतरण आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा मामले की जांच कर जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी कर्मचारी को कार्यमुक्त न किए जाने के पीछे प्रशासनिक कारण हैं या फिर कोई अन्य वजह। फिलहाल विभागीय अधिकारियों के बयान के बाद जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।