कोटा महंत हत्याकांड: 26 चाकू वार, 345 बीघा जमीन और करोड़ों की संपत्ति का खूनी खेल!

राजस्थान के कोटा में चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के पीछे 345 बीघा जमीन, करोड़ों रुपये की संपत्ति और मठ के नियंत्रण की लड़ाई सामने आई है। पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

कोटा के चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद महाराज हत्याकांड से जुड़ा दृश्य
चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के पीछे जमीन और संपत्ति विवाद की जांच जारी।

नई दिल्ली/अमर भारती। राजस्थान के कोटा जिले के ऐतिहासिक चंद्रेसल गांव स्थित प्राचीन मठ में महंत देवानंद महाराज की हत्या का मामला लगातार नए खुलासों के साथ सुर्खियों में बना हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हत्या केवल व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति, सैकड़ों बीघा जमीन और मठ के नियंत्रण की लड़ाई से जुड़ी एक बड़ी साजिश हो सकती है। 5 जून 2026 को हुई इस सनसनीखेज वारदात में महंत देवानंद महाराज की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जांच में खुलासा हुआ है कि उन पर 26 बार चाकू से हमला किया गया, जिससे घटना की क्रूरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब तक 8 गिरफ्तार, साजिश की परतें खुलनी शुरू

पुलिस ने मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक अन्य मठ पुजारी नंदन बन और कोटा के अधिवक्ता संतोष कुमार राय भी शामिल हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार हत्या को अंजाम देने के लिए एक नाबालिग सहित चार लोगों को कथित रूप से पैसे देकर बुलाया गया था। पुलिस का मानना है कि यह हत्या सुनियोजित तरीके से कराई गई और इसके पीछे आर्थिक तथा संस्थागत हित जुड़े हुए थे।

कौन थे देवानंद महाराज?

महंत देवानंद महाराज का मूल नाम देव शंकर पोसवाल था। उनका जन्म राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के राजवाना गांव में हुआ था। वर्ष 2006 में कम उम्र में उनका विवाह हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। साल 2018 में उन्होंने घर छोड़कर संन्यास ग्रहण किया और जूना अखाड़े से जुड़े। इसके बाद उन्हें चंद्रेसल मठ की जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यहीं से मठ के भीतर सत्ता और उत्तराधिकार को लेकर विवाद शुरू हो गया।

345 बीघा जमीन बना विवाद की जड़

पूरे विवाद के केंद्र में चंद्रेसल मठ की 345 बीघा (करीब 215 एकड़) जमीन बताई जा रही है। इस जमीन का इतिहास लगभग पांच दशक पुराना है। जानकारी के अनुसार पूर्व महंत द्वारा मठ की लगभग 500 बीघा भूमि बेचने के प्रयास के बाद ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी। लंबे संघर्ष के बाद 1998 में ग्रामीणों ने बड़ी मात्रा में भूमि वापस हासिल करने के लिए मुकदमा दायर किया। इसके बाद वर्ष 2003 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया, जिससे मठ की संपत्तियों का प्रशासनिक नियंत्रण महंत के व्यक्तिगत अधिकार से अलग हो गया।

4 करोड़ रुपये का फंड भी विवाद में

न्यायालय के आदेश के अनुसार 345 बीघा में से लगभग 270 बीघा कृषि भूमि की नियमित नीलामी की जाती रही। इस नीलामी से प्राप्त राशि बैंक खाते में जमा होती रही। सूत्रों के अनुसार वर्षों में यह राशि बढ़कर लगभग 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यही फंड अब विवाद का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन के साथ-साथ इस धनराशि पर नियंत्रण को लेकर भी कई पक्षों के बीच संघर्ष चल रहा था।

जाति, धर्म और सत्ता का जटिल समीकरण

मामले की जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार विवाद केवल संपत्ति तक सीमित नहीं था। इसमें जातीय और धार्मिक समीकरण भी जुड़ते चले गए। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि देवानंद महाराज विशेष समुदाय के लोगों को प्राथमिकता दे रहे थे। दूसरी ओर उनके समर्थकों का दावा है कि महंत मठ की संपत्तियों को व्यवस्थित करने और अवैध कब्जों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। इन्हीं आरोप-प्रत्यारोपों के बीच मठ के भीतर ध्रुवीकरण बढ़ता गया और विवाद अदालतों तक पहुंच गया।

पुलिस की जांच किन बिंदुओं पर?

जांच एजेंसियां फिलहाल इन प्रमुख बिंदुओं पर फोकस कर रही हैं:

  • हत्या की साजिश किस स्तर पर रची गई?
  • कथित सुपारी के लिए धन किसने उपलब्ध कराया?
  • जमीन और ट्रस्ट फंड विवाद में किन-किन लोगों की भूमिका थी?
  • क्या हत्या का सीधा संबंध मठ के प्रशासनिक नियंत्रण से है?
  • गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन लोग साजिश में शामिल थे?

आगे क्या?

पुलिस का दावा है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, ट्रस्ट फाइलें और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। महंत देवानंद हत्याकांड अब केवल एक हत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान के सबसे चर्चित धार्मिक-संपत्ति विवादों में से एक बन चुका है। 10वीं सदी पुराने मठ, 345 बीघा जमीन, करोड़ों रुपये के फंड और सत्ता संघर्ष के बीच यह मामला कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है, जिनके जवाब अब पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया से सामने आएंगे।

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