लखनऊ।उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय से प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ ऑनलाइन उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक कर कानून-व्यवस्था, कांवड़ यात्रा, अपराध नियंत्रण और लंबित विवेचनाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी कांवड़ यात्रा और अन्य पर्वों को “Zero Incident & Zero Accident” के लक्ष्य के साथ संपन्न कराया जाए।

डीजीपी ने कहा कि यक्ष ऐप की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बीट सूचना है। इसलिए बीट सूचना तंत्र को मजबूत करते हुए सक्रिय अपराधियों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराया जाए। सत्यापन के दौरान जो अपराधी लापता मिलें, उनकी गिरफ्तारी के लिए एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाए।
बैठक में हत्या, डकैती, लूट, चेन स्नैचिंग समेत सभी गंभीर अपराधों के शीघ्र खुलासे और सक्रिय अपराधियों पर गैंगस्टर व गुंडा एक्ट जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर डीजीपी ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, यातायात प्रबंधन तथा पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालय और शासन के निर्देशों के अनुरूप डीजे की ऊंचाई और ध्वनि सीमा का पालन कराने पर भी जोर दिया।
बैठक में लंबित विवेचनाओं की निगरानी के लिए विकसित Case Diary Monitoring Dashboard पोर्टल का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस पोर्टल के जरिए 60 और 90 दिन से अधिक लंबित विवेचनाओं पर संबंधित अधिकारियों को 15 दिन पहले ही अलर्ट मिलेगा, जिससे समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा।
डीजीपी ने बताया कि ZFD एवं RTC अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 1 जनवरी से 30 जून 2026 के दौरान वर्ष 2025 की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 9 प्रतिशत और दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में 10 प्रतिशत की कमी आई है। इससे 800 से अधिक लोगों की जान बचाने में सफलता मिली है।
महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद दहेज हत्या के मामलों में लगभग 43 प्रतिशत और दहेज प्रताड़ना के मामलों में करीब 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सभी परिक्षेत्रीय अधिकारियों को मिशन शक्ति केंद्रों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए।
बैठक में थानों पर खड़े वाहनों के शीघ्र निस्तारण, सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ पोस्टों पर कड़ी निगरानी, गुमशुदा बच्चों एवं महिलाओं की शीघ्र बरामदगी तथा मीडिया को समयबद्ध एवं तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।