Bihar Vigilance Bribery Case: 50 हजार रुपये रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार, निगरानी टीम ने रंगे हाथों पकड़ा

Bihar Vigilance Bribery Case में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते एक दारोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

Bihar Vigilance Bribery Case officer arrested while taking bribe money
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने रिश्वत लेते हुए दारोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

नई दिल्ली/अमर भारती। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दारोगा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई रिसियप थाना क्षेत्र में की गई, जहां पदस्थापित दारोगा उमेश कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते समय पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया।

शिकायत के बाद हरकत में आई निगरानी टीम

निगरानी अधिकारियों के अनुसार, रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने 24 जुलाई को निगरानी थाना, पटना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में राहत देने के नाम पर अनुसंधानकर्ता दारोगा उमेश कुमार रिश्वत की मांग कर रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष योजना तैयार की गई।

जांच में सही मिली रिश्वत मांगने की शिकायत

निगरानी डीएसपी संतोष कुमार ने बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दारोगा उमेश कुमार वास्तव में शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग कर रहे थे। आरोप है कि शुरुआत में उन्होंने दो लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के दौरान यह राशि घटाकर डेढ़ लाख रुपये और फिर एक लाख रुपये कर दी गई। जांच एजेंसी ने पूरे मामले की निगरानी की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ट्रैप की कार्रवाई का निर्णय लिया।

केस में राहत देने के नाम पर मांगी गई थी रकम

जानकारी के अनुसार, डॉ. लक्ष्मण राम का गांव के ही एक व्यक्ति से नाली-गली को लेकर विवाद चल रहा था। 14 जुलाई को दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें डॉ. लक्ष्मण घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की थी। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी दारोगा उमेश कुमार को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसी दौरान उन्होंने केस में राहत दिलाने और कार्रवाई को प्रभावित करने के नाम पर शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की।

50 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

निगरानी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता दारोगा को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये देने पहुंचे। जैसे ही आरोपी दारोगा ने थाना परिसर के पीछे स्थित पंचायत सरकार भवन के सामने सड़क पर राशि स्वीकार की, निगरानी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। पूरी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया।

शिकायतकर्ता ने लगाए धमकी देने के आरोप

डॉ. लक्ष्मण राम ने आरोप लगाया कि रिश्वत की रकम देने में देरी होने पर दारोगा लगातार दबाव बना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि आरोपी अधिकारी द्वारा उन्हें और उनके परिवार को विभिन्न मामलों में फंसाने तथा गंभीर धाराओं में कार्रवाई कराने की धमकी भी दी जा रही थी। हालांकि इन आरोपों की जांच भी संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है और सभी तथ्यों को जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

पटना ले जाकर की जा रही आगे की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपी दारोगा को अपने साथ पटना ले गई। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई प्रशासन की सख्त नीति को दर्शाती है। निगरानी विभाग का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

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