रिलायंस इंडस्ट्रीज का एनर्जी सेक्टर में बड़ा निवेश प्लान

नई दिल्ली/अमर भारती। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े निवेश का प्रस्ताव रखा है। कंपनी आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में भारत का पहला इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड कोल गैसिफिकेशन (UCG) कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की योजना बना रही है।
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस प्रोजेक्ट के लिए अगले 30 वर्षों में करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव राज्य सरकार के सामने रखा है। यह प्रोजेक्ट कंपनी को हाल ही में मिले चिंतलपुडी और रेचेरला कोल ब्लॉक्स में विकसित किया जाएगा। इन दोनों ब्लॉक्स में करीब 3,130 मिलियन टन कोयले का भंडार होने की जानकारी है।
तीन चरणों में पूरा होगा रिलायंस का UCG प्रोजेक्ट
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, आगे का निवेश शुरुआती एक्सप्लोरेशन के नतीजों पर निर्भर करेगा।
पहला चरण: एक्सप्लोरेशन और पायलट प्रोजेक्ट
रिलायंस के पहले चरण में 2026 की तीसरी तिमाही से 2027 के अंत तक एक्सप्लोरेशन और पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा। इस चरण में करीब 3,000 करोड़ रुपये तक खर्च करने का प्रस्ताव है।
दूसरा चरण: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
अगर शुरुआती रिलायंस के चरण सफल रहता है तो 2028 से 2030 के बीच प्रोजेक्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जाएगा। इस चरण में करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
तीसरा चरण: कमर्शियल प्रोडक्शन
रिलायंस के तीसरे चरण में 2030 से कमर्शियल उत्पादन शुरू करने की योजना है। इसके लिए करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।इस तरह तीनों चरणों में प्रस्तावित निवेश करीब 2.73 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
क्या है Underground Coal Gasification यानी UCG?
अंडरग्राउंड कोल गैसिफिकेशन (UCG) ऐसी तकनीक है, जिसमें जमीन के नीचे मौजूद कोयले को सीधे निकालने के बजाय उसे वहीं गैस में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में नियंत्रित तरीके से गर्मी, भाप और सीमित ऑक्सीजन की मदद से कोयले को सिनगैस (Synthesis Gas) में बदला जाता है। इसके बाद इस गैस का इस्तेमाल अलग-अलग औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। रिलायंस की UCG तकनीक का प्रमुख उद्देश्य भूमिगत कोयले के संसाधनों का उपयोग करते हुए गैस का उत्पादन करना है। हालांकि, इसके पर्यावरणीय प्रभाव और भूजल से जुड़े जोखिमों का आकलन प्रोजेक्ट स्तर पर जरूरी होता है।
भारत के कोल गैसिफिकेशन मिशन से जुड़ा प्रोजेक्ट
रिलायंस का प्रस्तावित प्रोजेक्ट भारत सरकार के नेशनल कोल गैसिफिकेशन मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप बताया जा रहा है। कोयले को गैस में बदलकर उसका इस्तेमाल ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन में करने का उद्देश्य देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना है। इस तकनीक से तैयार गैस का इस्तेमाल केमिकल और फ्यूल के उत्पादन में किया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश में रोजगार के बड़े अवसर की उम्मीद
इस प्रोजेक्ट से आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। रिलायंस प्रस्ताव के मुताबिक, प्रोजेक्ट से सीधे करीब 3,000 से 5,000 लोगों को रोजगार मिल सकता है। वहीं, अप्रत्यक्ष रूप से 20,000 से 35,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, सर्विस और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश
रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सिर्फ कोयले के इस्तेमाल से जुड़ा नहीं है, बल्कि इससे तैयार गैस का उपयोग केमिकल और फ्यूल बनाने में किया जा सकता है। ऐसे में अगर बड़े स्तर पर घरेलू संसाधनों से गैस और उससे जुड़े उत्पादों का उत्पादन होता है तो भारत की आयातित कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रोजेक्ट अभी प्रस्ताव और चरणबद्ध विकास की प्रक्रिया में है। इसके वास्तविक आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव उत्पादन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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