CJP Cyber Fraud से जुड़े कथित फर्जी विज्ञापनों के जरिए लोगों को 50 हजार रुपये महीने कमाने का लालच दिया जा रहा है। जानिए साइबर ठगी से कैसे बचें।

नई दिल्ली/अमर भारती। देश में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अब एक नया ऑनलाइन ठगी मॉडल सामने आने का दावा किया जा रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर फर्जी प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। इस कथित अभियान में लोगों को हर महीने 50 हजार रुपये कमाने का लालच देकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट और प्रायोजित विज्ञापनों के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। इन विज्ञापनों में CJP से जुड़ने पर आकर्षक आय और विशेष सदस्यता लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं संदिग्ध विज्ञापन
खुफिया जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” के नाम से कुछ स्पॉन्सर्ड पोस्ट और विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। इन पोस्ट में लोगों को “सीनियर मेंबर” बनने का ऑफर दिया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि सदस्य बनने के बाद हर महीने 50 हजार रुपये तक की कमाई की जा सकती है।
इन विज्ञापनों में युवाओं को ऑनलाइन आवेदन करने, नेटवर्क तैयार करने और विभिन्न कैंपेन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावे अक्सर लोगों को आकर्षित करने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए किए जाते हैं।
QR कोड और ऑनलाइन फॉर्म के जरिए जाल बिछाने का आरोप
संदिग्ध पोस्ट में QR कोड और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन लिंक भी दिए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन माध्यमों से सदस्यता के लिए आवेदन किया जा सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे QR कोड या लिंक पर क्लिक करने से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर, बैंकिंग डिटेल्स या अन्य संवेदनशील डेटा गलत हाथों में जा सकता है। इसी कारण साइबर विशेषज्ञ किसी भी अज्ञात लिंक, QR कोड या ऑनलाइन फॉर्म पर जानकारी भरने से पहले उसकी सत्यता की जांच करने की सलाह देते हैं।
विदेश से संचालन की आशंका
खुफिया सूत्रों का दावा है कि इस तरह के संदिग्ध ऑनलाइन अभियान का संचालन विदेश से किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्ध डोमेन और ऑनलाइन गतिविधियों की पहचान की है और उनकी जांच की जा रही है। हालांकि संबंधित एजेंसियों की ओर से इस मामले पर आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है। इसलिए जांच पूरी होने तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
युवाओं को विशेष रूप से बनाया जा रहा निशाना
साइबर अपराधी अक्सर बेरोजगार युवाओं, छात्रों और अतिरिक्त आय की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाते हैं। आसान कमाई, घर बैठे नौकरी या हर महीने निश्चित आय जैसे वादों के जरिए लोगों को फंसाने की कोशिश की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई संगठन बिना स्पष्ट प्रक्रिया के अत्यधिक कमाई का दावा करता है, तो उसकी विश्वसनीयता की जांच अवश्य करनी चाहिए। किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट और प्रमाणिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर जानकारी को सही मानने की गलती न करें। किसी भी ऑफर, विज्ञापन या सदस्यता अभियान की सत्यता की पुष्टि करना आवश्यक है। लोगों को अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, पासवर्ड, आधार नंबर या अन्य निजी जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति या वेबसाइट के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा संदिग्ध QR कोड स्कैन करने और अनजान लिंक पर क्लिक करने से भी बचना चाहिए।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर ऐसा कोई संदिग्ध विज्ञापन या ऑफर दिखाई देता है, तो उसकी जानकारी संबंधित साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय साइबर पुलिस को देनी चाहिए। इससे न केवल स्वयं को बल्कि अन्य लोगों को भी संभावित साइबर ठगी से बचाया जा सकता है।
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