अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान ने Strait of Hormuz को अपनी रेड लाइन बताया है। तेहरान ने अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की स्थिति में कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग के प्रबंधन में किसी भी बाहरी ताकत, खासकर अमेरिका, का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए इसे अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ करार दिया है।
ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियों को अमल में लाया गया, तो ईरानी सेना क्षेत्र के उन बुनियादी ढांचों को भी निशाना बना सकती है, जो अब तक हमलों से बचे हुए हैं।
ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी
ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका को यह समझना होगा कि ईरान अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया, तो जवाब सीमित या समान स्तर का नहीं होगा, बल्कि उससे कहीं अधिक गंभीर, व्यापक और विनाशकारी हो सकता है। ईरान की ओर से जारी संदेश में यह भी कहा गया कि उसकी सशस्त्र सेनाएं पहले से ही जवाबी कार्रवाई कर रही हैं। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा व्यापक हो सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट को बताया ‘अटूट रेड लाइन’
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना रुख बेहद सख्त कर दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका एक बाहरी और क्षेत्र से बाहर की शक्ति है, इसलिए उसे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का वैश्विक व्यापार होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
गालिबाफ बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है होर्मुज
ईरान की संसद के अध्यक्ष और वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तेहरान का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग में ईरान की भूमिका और नियंत्रण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं। गालिबाफ के मुताबिक, ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी स्थिति का सामना करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कोई भी दुश्मन ईरान पर अपनी शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं है।
अमेरिका के साथ हुए एमओयू पर भी सवाल
गालिबाफ ने अमेरिका के साथ हाल में हुए शांति समझौता ज्ञापन यानी एमओयू को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी समझौते की अहमियत तभी है, जब उसकी शर्तों का पालन किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि समझौते से ईरान को कोई लाभ नहीं मिलता या उसकी शर्तों का पालन नहीं होता, तो तेहरान के लिए उस समझौते पर कायम रहने का औचित्य कमजोर हो सकता है। दोनों देशों के बीच तनाव के बीच यह बयान कूटनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हवाई हमले
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव भी जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों की पुष्टि की है। अमेरिका का कहना है कि उसके हमलों का उद्देश्य उन सैन्य ठिकानों और क्षमताओं को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा रहा था। अमेरिकी कमांड के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिन्हें समुद्री यातायात के लिए खतरा माना जा रहा है।
बढ़ते तनाव से दुनिया की नजर होर्मुज पर
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ अमेरिका ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी अमेरिकी दखल को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई मान रहा है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर खाड़ी क्षेत्र, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश सैन्य टकराव को और बढ़ाते हैं या फिर एमओयू और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता तलाशते हैं।
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