NEET पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा मामले पर विपक्ष की सरकार को घेरने की तैयारी

नई दिल्ली/अमर भारती। संसद का मानसून सत्र आज से शुरू होने जा रहा है। सत्र की शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर टकराव के संकेत मिल गए हैं। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने NEET-UG पेपर लीक, अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। सर्वदलीय बैठक में भी विपक्षी दलों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की मांग की। ऐसे में माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है।
सरकार के एजेंडे में 7 अहम विधेयक
एनडीए सरकार इस सत्र में करीब सात महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें आयकर संशोधन से जुड़े प्रावधान, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम कानून में संशोधन और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या से संबंधित संशोधन विधेयक प्रमुख हैं। सरकार का प्रयास है कि इन विधेयकों पर सदन में चर्चा के बाद इन्हें पारित कराया जाए। वहीं, विपक्ष इन विधेयकों और सरकार की नीतियों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर सकता है।
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर विपक्ष हमलावर
विपक्ष ने NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी की है। विपक्षी दलों का कहना है कि बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने भी परीक्षा प्रश्नपत्रों के बार-बार लीक होने पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सरकार को घेरने की तैयारी
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है और विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाएगा। विपक्षी दलों ने सर्वदलीय बैठक के दौरान भी राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा की मांग की थी। अब इस मुद्दे पर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।
‘वंदे मातरम’ से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश कर सकते हैं। प्रस्तावित संशोधन में राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ के अपमान या उसमें बाधा डालने को लेकर कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में पेश कर सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विकास दर और पश्चिम एशिया संकट का किया जिक्र
सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, LPG और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में वैश्विक संकट का असर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला देश बना रहा। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि मानसून की तरह संसद का यह सत्र भी सकारात्मक और उत्पादक साबित होगा। उन्होंने कहा कि यदि मानसून और संसद का मानसून सत्र दोनों सकारात्मक हों, तो इससे देश के विकास और जनकल्याण को लाभ मिलता है।
मनीष तिवारी ने दल-बदल कानून पर चर्चा की मांग की
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में दल-बदल कानून के नियमों को लेकर एडजर्नमेंट मोशन नोटिस दिया है। उनका कहना है कि राजनीतिक दल-बदल पर रोक लगाने वाले कानून में ईमानदार और नीतिगत असहमति के लिए भी पर्याप्त जगह होनी चाहिए। इस मुद्दे पर संसद में संवैधानिक व्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर बहस होने की संभावना है।
परिसीमन, महिला आरक्षण और एथनॉल का मुद्दा भी उठेगा
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा एथनॉल नीति और उसके प्रभावों पर चर्चा की मांग भी की गई।
समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने कहा है कि वे सत्र के दौरान जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि पार्टी बैठक के बाद तय करेगी कि किन मुद्दों को प्रमुखता से सदन में उठाया जाएगा।
मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष से सहयोग की अपील की
बसपा प्रमुख मायावती ने संसद के सुचारू संचालन की अपील की है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करना चाहिए। हालांकि, मुद्दों की लंबी सूची और राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों को देखते हुए सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर संसद का मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष NEET पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा मामले, परिसीमन, महिला आरक्षण और अन्य मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। अब देखना होगा कि सदन में बहस और चर्चा का माहौल बनता है या राजनीतिक टकराव के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती है।
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