
किरावली। फतेहपुर सीकरी हाईवे मार्ग पर स्थित कृषि प्रसार कार्यालय पिछले लगभग 30 वर्षों से बदहाली का शिकार है। स्थानीय लोगों और किसानों का आरोप है कि यह कार्यालय अब महज कागजों में संचालित हो रहा है, जबकि भवन पूरी तरह जर्जर होकर किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।
किसानों के अनुसार, एक समय यह कार्यालय क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र था, जहां खाद, बीज, कीटनाशक दवाएं और कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते थे। लेकिन वर्षों से भवन की स्थिति लगातार खराब होती चली गई और अब यह खंडहर में तब्दील हो चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की दीवारें और छतें अत्यंत जर्जर हो चुकी हैं। आसपास रहने वाले परिवारों और यहां कार्यरत कर्मचारियों के सिर पर हर समय दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व कृषि अधिकारी केपी शर्मा के कार्यकाल में कार्यालय सुचारु रूप से संचालित होता था, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद व्यवस्था धीरे-धीरे चरमरा गई। वर्तमान में यहां कर्मचारियों की तैनाती तो है, लेकिन किसानों का आरोप है कि कार्यालय में नियमित गतिविधियां नहीं होतीं।
कुछ किसानों ने कृषि रक्षा इकाई से जुड़ी सामग्रियों के कथित बंदरबांट और विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद अब तक किसी उच्चस्तरीय जांच की पहल नहीं की गई।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जर्जर भवन के पुनर्निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव और बजट की मांग भेजी गई है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इस बीच भवन की खस्ता हालत लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
क्षेत्रीय नागरिकों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन का तकनीकी निरीक्षण कराकर जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि किसी संभावित हादसे से बचा जा सके।