
लखनऊ। राजधानी में आयोजित प्रेसवार्ता में आगामी अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में संतों, श्रद्धालुओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है। सम्मेलन में मौजूद संतों और वक्ताओं ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवाश्री ऋतु ने कहा कि इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए भगवान शिव का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की विजय में महादेव का विशेष आशीर्वाद रहा है और यही कारण है कि यह यात्रा हरिहर स्वरूप में सनातन धर्म की एकता का संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि देश की आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने में इस प्रकार के अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राम मंदिर आंदोलन की यादें आज भी जीवित: अमरजीत मिश्रा
राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए अमरजीत मिश्रा ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष आज भी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और यह यात्रा उनके लिए केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है। वहीं, वेद प्रकाश ने बताया कि यह उनका पहला राष्ट्रीय आध्यात्मिक अभियान है, जिसके माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का व्यापक प्रसार हुआ है।
संतों ने युवाओं को संस्कृति से जोड़ने पर दिया जोर
कार्यक्रम में अयोध्या से पहुंचे संत जन्मेजय शरण और आचार्य डॉ. संतोष विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों संतों ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है। जानकी घाट बड़ा मंदिर रसिक पीठाधीश्वर संत जन्मेजय शरण ने कहा कि सनातन धर्म मानव जीवन का आधार है और युवाओं को इसके मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 20 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन किया जाएगा।
चार चरणों में पूरी होगी यात्रा, देशभर के प्रमुख शहर होंगे शामिल
आयोजकों के अनुसार यह यात्रा चार चरणों में पूरी की जाएगी और इसकी कुल दूरी लगभग 11,800 किलोमीटर होगी। यात्रा पैदल, वाहन और ट्रेन के माध्यम से संपन्न होगी। पहले चरण में यात्रा दिल्ली से शुरू होकर मथुरा, आगरा, धौलपुर, ग्वालियर, झांसी, उज्जैन, नासिक, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, उदयपुर और जयपुर होते हुए पुणे पहुंचेगी तथा वहां से पुनः दिल्ली लौटेगी।
दूसरे चरण में यात्रा दिल्ली से बीकानेर, पटियाला, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, जम्मू, चंडीगढ़, देहरादून, हरिद्वार, मेरठ और गाजियाबाद होते हुए दोबारा दिल्ली पहुंचेगी। तीसरे चरण में दिल्ली से बरेली, अयोध्या, पटना, कोलकाता, रांची, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, फिरोजाबाद और नोएडा होते हुए यात्रा पुनः दिल्ली में समाप्त होगी। वहीं चौथा चरण ट्रेन के माध्यम से दिल्ली से रामेश्वरम और पुणे होते हुए वापस दिल्ली तक पूरा किया जाएगा।
प्रत्येक चरण में होंगे अश्वमेध धर्म यज्ञ
संत जन्मेजय शरण ने बताया कि यात्रा के प्रत्येक निर्धारित पड़ाव पर अश्वमेध धर्म यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम त्याग, सेवा और मर्यादा के प्रतीक हैं तथा युवाओं को उनके आदर्शों से जोड़ना राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उनका मानना है कि यह यात्रा भारतीय संस्कृति और गौरवशाली विरासत के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने का कार्य करेगी।
देश-विदेश से मिल रहा समर्थन
चक्रवर्तुला रमणाचा ने कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से धर्म सेवा से जुड़ा रहा है और यह यात्रा उनके लिए आध्यात्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने कहा कि इस अभियान ने युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य किया है। वहीं, थाईलैंड से विनोद हांडा ने शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि यह महाअभियान वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाएगा।
आचार्य डॉ. संतोष ने श्रद्धालुओं और युवाओं से धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता को नई दिशा मिलती है।