परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति।

नई दिल्ली/अमर भारती। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने के लिए एक उच्चस्तरीय छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकानी करेंगे।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित अपने संदेश में कहा कि सरकार पहले ही पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून, फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े दंड जैसे कदम उठा चुकी है। अब अगला लक्ष्य परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से इतना मजबूत बनाना है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान और परिणाम प्रक्रिया पूरी तरह विश्वसनीय बन सके। आइए जानते हैं इस हाई लेवल पैनल में शामिल छह विशेषज्ञ कौन हैं और उनकी क्या भूमिका होगी।
1. नंदन नीलेकानी – समिति के अध्यक्ष, तकनीकी सुधारों की कमान
इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारत के आधार (Aadhaar) डिजिटल पहचान कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकानी इस समिति का नेतृत्व करेंगे। 2 जून 1955 को बेंगलुरु में जन्मे नीलेकानी ने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उन्हें बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने का लंबा अनुभव है। समिति में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी परीक्षा प्रणाली को तकनीक के जरिए सुरक्षित बनाना होगी। वे ऐसे डिजिटल समाधान सुझाएंगे, जिनसे-
- प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित रहें।
- उम्मीदवारों की डिजिटल पहचान सत्यापित हो।
- परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े।
- परिणाम तेजी और सटीकता के साथ जारी किए जा सकें।
2. एस. सोमनाथ – बड़े तकनीकी सिस्टम की निगरानी
पूर्व ISRO अध्यक्ष एस. सोमनाथ समिति के दूसरे प्रमुख सदस्य हैं। 1963 में केरल के अलाप्पुझा जिले में जन्मे सोमनाथ ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 2022 से 2025 तक इसरो प्रमुख के रूप में कार्य किया। रॉकेट और अंतरिक्ष तकनीक में दशकों का अनुभव रखने वाले सोमनाथ बड़े स्तर की तकनीकी प्रणालियों के डिजाइन, विश्वसनीयता और संचालन से जुड़े सुझाव देंगे।
3. तपन कुमार डेका – परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करेंगे
पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक तपन कुमार डेका समिति में सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में शामिल किए गए हैं। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी डेका ने आतंकवाद विरोधी अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन का नेतृत्व किया है।
समिति में उनकी भूमिका होगी-
- परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था।
- पेपर लीक रोकने के उपाय।
- साइबर और भौतिक सुरक्षा का एकीकृत मॉडल तैयार करना।
- संवेदनशील परीक्षा सामग्री की सुरक्षित निगरानी।
4. वी. कामाकोटी – साइबर सिक्योरिटी और शिक्षा तकनीक के विशेषज्ञ
IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी समिति में शिक्षा और तकनीकी शोध का प्रतिनिधित्व करेंगे। वे कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और माइक्रोप्रोसेसर विकास के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता परीक्षा प्रणाली को साइबर हमलों और डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
5. अनीता कारवाल – शिक्षा नीति का अनुभव
1988 बैच की IAS अधिकारी अनीता कारवाल शिक्षा प्रशासन का लंबा अनुभव रखती हैं। वे CBSE की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और बाद में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव भी रहीं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे के निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही है। समिति में वे परीक्षा सुधारों को शिक्षा नीति और स्कूली व्यवस्था से जोड़ने पर सुझाव देंगी।
6. अमृत लाल मीना – प्रशासन और लॉजिस्टिक्स के विशेषज्ञ
बिहार कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी अमृत लाल मीना प्रशासनिक और लॉजिस्टिक्स सुधारों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।वे बिहार के मुख्य सचिव और कोयला मंत्रालय के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनकी जिम्मेदारी परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्र प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना होगी।
समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सरकार ने इस उच्चस्तरीय समिति को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- पेपर लीक रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
- प्रश्नपत्रों की एंड-टू-एंड सुरक्षा।
- उम्मीदवारों की डिजिटल पहचान सत्यापन।
- साइबर सुरक्षा को मजबूत करना।
- परीक्षा संचालन और लॉजिस्टिक्स में सुधार।
- परिणाम प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाना।
- सार्वजनिक परीक्षाओं में जनता का भरोसा बहाल करना।
परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर सरकार परीक्षा प्रक्रिया में दीर्घकालिक और संरचनात्मक सुधार लागू करना चाहती है। इस समिति की सिफारिशें भविष्य में देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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