TMC में बगावत से NDA की बल्ले-बल्ले? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास करवाने का खुल रहा रास्ता, चाणक्य की स्ट्राइक से सदमे में विपक्ष?

TMC में बढ़ते असंतोष और सांसदों की नाराजगी क्या NDA को संसद में मजबूत करेगी? जानिए परिसीमन बिल, महिला आरक्षण और लोकसभा के बदलते राजनीतिक समीकरण।

TMC Rebellion Women Reservation Bill NDA Majority
TMC Rebellion Women Reservation Bill NDA Majority

नई दिल्ली/अमर भारती। संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। इसी बीच यह अटकलें तेज हैं कि केंद्र सरकार संविधान संशोधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को दोबारा पेश कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में टूट या क्रॉस-वोटिंग जैसी स्थिति बनती है तो सत्ता पक्ष के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।

TMC में असंतोष क्यों बना चर्चा का विषय?

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आई हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा नेतृत्व पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, कई बैठकों में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी है। चर्चा यह भी है कि लोकसभा में टीएमसी के कुछ सांसद अलग रणनीति अपनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से किसी आधिकारिक विभाजन या टूट की पुष्टि नहीं की गई है।

लोकसभा में क्या हैं मौजूदा आंकड़े?

लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 है। संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सामान्यतः दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

प्रमुख आंकड़े

विवरणसंख्या
लोकसभा की कुल सीटें543
वर्तमान प्रभावी संख्या (कुछ सीटें रिक्त)540 के आसपास
NDA के पास समर्थन293
TMC के कुल सांसद29
बागी सांसदों की चर्चालगभग 20
दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्यलगभग 360+

यदि चर्चा के अनुरूप टीएमसी के 20 सांसद किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर NDA का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 293 से बढ़कर 313 तक पहुंच सकता है।

क्या DMK और अन्य दल बदल सकते हैं समीकरण?

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ क्षेत्रीय दल विशेष मुद्दों पर अलग रुख अपना सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति में बदलते समीकरणों को देखते हुए DMK की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है। यदि किसी विधेयक पर क्षेत्रीय दलों का आंशिक समर्थन मिलता है, तो सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

उद्धव गुट और छोटे दलों पर भी नजर

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सत्ता पक्ष की नजर कुछ छोटे दलों, निर्दलीय सांसदों और विपक्षी गठबंधनों के असंतुष्ट सांसदों पर भी है। क्रॉस-वोटिंग या अनुपस्थिति की स्थिति में संसद का गणित पूरी तरह बदल सकता है। यही कारण है कि आगामी मानसून सत्र को केवल विधायी सत्र नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है।

संवैधानिक संशोधन के लिए क्या चाहिए?

किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। साथ ही सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम आधे सदस्यों की उपस्थिति भी जरूरी होती है। यही वजह है कि केवल कुल संख्या ही नहीं, बल्कि मतदान के समय मौजूद सांसदों की संख्या भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

राज्यसभा में क्या है स्थिति?

राज्यसभा में भी NDA की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि लोकसभा में पर्याप्त समर्थन मिल जाता है तो राज्यसभा में भी सरकार को अपेक्षाकृत कम कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। टीएमसी में बढ़ता असंतोष फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति का मुद्दा दिखाई देता है, लेकिन इसके असर राष्ट्रीय स्तर पर भी महसूस किए जा सकते हैं। यदि विपक्षी दलों में टूट, क्रॉस-वोटिंग या रणनीतिक समर्थन जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तो संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों का गणित बदल सकता है। अब सबकी नजर आगामी मानसून सत्र और उससे पहले होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी है।

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