बाराबंकी में बेशकीमती भूखंड को लेकर विवाद: प्रॉपर्टी डीलर ने बीजेपी MLC पर लगाए गंभीर आरोप

पंकज चतुर्वेदी

बाराबंकी। बाराबंकी के माती थानाक्षेत्र के टिकरिया गांव में स्थित एक बेशकीमती भूखंड को लेकर विवाद गहरा गया है। लखनऊ के एक प्रॉपर्टी डीलर ने भाजपा एमएलसी अंगद सिंह और उनके सहयोगियों पर जमीन पर कब्जा करने, निर्माण कार्य रुकवाने तथा मजदूरों के साथ मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी एमएलसी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए दावा किया है कि उन्होंने संबंधित भूमि की खरीद सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की है।

भूखंड पर निर्माण के दौरान विवाद, जान से मारने की धमकी का आरोप

लखनऊ के संजय गांधी पुरम निवासी आनंद वर्मा ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि माती थाना क्षेत्र के टिकरिया गांव स्थित गाटा संख्या 842 मि. की भूमि उनके स्वामित्व में है। उनके अनुसार, 3 जून 2026 को उक्त भूखंड पर निर्माण कार्य चल रहा था, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और मजदूरों के साथ मारपीट करते हुए निर्माणाधीन दीवार को गिरा दिया। आनंद वर्मा का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें असलहा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है।

जेसीबी से कमरे और बाउंड्रीवॉल तोड़े जाने का दावा

शिकायतकर्ता का कहना है कि विवाद यहीं नहीं रुका। उनके मुताबिक 13 जून की रात जेसीबी मशीन से भूखंड पर बने दो कमरों और बाउंड्रीवॉल को भी ध्वस्त कर दिया गया। आनंद वर्मा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के चलते स्थानीय पुलिस उनकी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

एमएलसी अंगद सिंह ने आरोपों को बताया भ्रामक और तथ्यहीन

दूसरी ओर भाजपा एमएलसी अंगद सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि आनंद वर्मा पूर्व में ‘मैपल्स’ नामक कंपनी के माध्यम से प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करते थे और फरवरी 2012 में ही विवादित दो हजार वर्गफुट भूमि की रजिस्ट्री दुर्गावती पत्नी बलराम कुमार मणि त्रिपाठी के नाम कर दी गई थी। एमएलसी के अनुसार, उक्त भूमि का दाखिल-खारिज भी विधिवत हो चुका है।

वसीयत और रजिस्ट्री के आधार पर खरीदी गई जमीन : एमएलसी

अंगद सिंह का कहना है कि दुर्गावती के निधन के बाद वसीयत के आधार पर यह भूमि उनके पांच बच्चों के नाम दर्ज हुई। उन्होंने बताया कि सभी राजस्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद उन्होंने त्रिपाठी परिवार से नियमानुसार उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई है। उनके अनुसार, जब वर्ष 2012 में ही भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित हो चुका था, तब वर्तमान में उस पर दावा करना और आरोप लगाना पूरी तरह तथ्यहीन है।

जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल इस मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। एक ओर प्रॉपर्टी डीलर जमीन पर कब्जा, मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर भाजपा एमएलसी भूमि की खरीद को वैधानिक और दस्तावेजों के अनुरूप बता रहे हैं। ऐसे में विवाद की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।