
कोसीकलां। देवस्थान गौशाला के समीप स्थित कुटा स्थान के श्री महंत श्री 108 वैष्णव दास जी महाराज त्यागी (कुटा वाले बाबा) का गुरुवार तड़के करीब चार बजे ब्रह्मलीन हो गया। उनके साकेत धाम गमन का समाचार मिलते ही ब्रज क्षेत्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवस्थान कुटा पहुंच गए और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
वृंदावन के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे वैष्णव दास महाराज ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सांसारिक जीवन का त्याग कर स्वयं को प्रभु भक्ति, गौसेवा, तपस्या और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। वह श्री श्री 1008 महंत गोमती दास जी महाराज त्यागी एवं श्री श्री 1008 महंत मंगलदास जी महाराज त्यागी के कृपापात्र शिष्य रहे। ब्रज क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर उनके छह आश्रम हैं और देशभर में उनके हजारों अनुयायी हैं।
श्रद्धालुओं के अनुसार महंत वैष्णव दास महाराज ने आजीवन सादगी, त्याग और सेवा का मार्ग अपनाया। उन्होंने आश्रमों की संपत्तियां श्री ठाकुर जी को समर्पित कर दी थीं। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद देवस्थान कुटा में भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए।
इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा नगर भ्रमण करते हुए वृंदावन पहुंची, जहां यमुना तट पर वैदिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया और उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है।