Earthquake: एक बार फिर धरती कांपी… झज्जर, दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल – हर कुछ हफ्तों में किसी न किसी हिस्से में महसूस किए जाते हैं भूकंप के झटके।
Earthquake: भूकंप क्या होता है?
भूकंप, यानी धरती की गहराइयों में छुपी हलचल का वो असर, जो सतह पर तबाही बनकर आता है।
जब पृथ्वी के अंदर प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या खिसकती हैं, तो एक जोरदार ऊर्जा निकलती है – यही कंपन भूकंप के रूप में हमें महसूस होती है।
क्यों बार-बार आ रहा है?
भारत का उत्तर और उत्तर-पूर्वी इलाका – यानी हिमालयन बेल्ट – सबसे ज्यादा भूकंपीय जोन में आता है।
यह इलाका ‘इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट’ और ‘यूरेशियन प्लेट’ के टकराव पर बसा है।
और यही टकराव बार-बार धरती के नीचे दबाव बनाता है… और जब ये दबाव टूटता है, तो आता है भूकंप।
हाल की घटनाएं
10 जुलाई को हरियाणा के झज्जर में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया।
इससे पहले 3 जुलाई को लद्दाख, 28 जून को मिजोरम और मई में नेपाल में झटके महसूस किए गए थे।
यानि हर कुछ दिन में धरती चेतावनी दे रही है।
क्या हम तैयार हैं?
बड़े भूकंप से पहले छोटे झटके आम होते हैं – वैज्ञानिक इन्हें ‘फोरशॉक्स’ कहते हैं।
लेकिन भारत की बहुमंज़िला इमारतें, घनी आबादी और खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर – किसी बड़े भूकंप के लिए तैयार नहीं हैं।
NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन सवाल यही है – क्या जनता और सिस्टम दोनों जागरूक हैं?
भूकंप कब आएगा, ये कोई नहीं जानता… लेकिन तैयार रहना – यही हमारी सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।
क्योंकि धरती जब हिलती है, तो सिर्फ इमारतें नहीं – ज़िंदगियां भी टूटती हैं।
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