हजारों करोड़ खर्च के बावजूद यमुना अब भी जहरीली क्यों?


किरावली (आगरा)। यमुना नदी की बदहाल स्थिति एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। अरबों रुपये खर्च होने और कई सरकारी योजनाएं चलने के बावजूद यमुना का पानी आज भी जहरीला बना हुआ है। हाल के हादसों ने प्रशासनिक व्यवस्था और नदी संरक्षण के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
12 मई 2026 की शाम आगरा के एक घाट पर जन्मदिन मनाने पहुंचे छह युवाओं में से चार की यमुना में डूबने से मौत हो गई। दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव बाहर निकाले गए। इससे पहले वृंदावन के केशी घाट पर नाव पलटने से 15 से अधिक तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे इन हादसों ने नदी किनारे सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।
विशेषज्ञों और पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार लगभग 1,376 किलोमीटर लंबी Yamuna River का बड़ा हिस्सा दिल्ली के बाद प्रदूषित नाले में तब्दील हो चुका है। करोड़ों लीटर बिना शोधन का सीवेज प्रतिदिन नदी में गिर रहा है। कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अधूरे हैं या पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे।
Central Pollution Control Board सहित कई पर्यावरणीय एजेंसियों की रिपोर्टों में नदी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फीकल कॉलिफॉर्म का स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पाया गया है। कई स्थानों पर पानी नहाने योग्य भी नहीं बचा है।
दिल्ली से निकलने वाला प्रदूषण मथुरा, वृंदावन और आगरा तक पहुंचता है। धार्मिक नगरी होने के बावजूद इन शहरों में नाले सीधे यमुना में गिरते हैं। आगरा में Taj Mahal के पीछे बहती यमुना अक्सर काले पानी, झाग और बदबू के कारण चर्चा में रहती है। यह केवल सौंदर्य का नहीं बल्कि गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का विषय बन चुका है।
तीन दशक में यमुना एक्शन प्लान और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसी कई परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद नदी की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा। सवाल अब भी वही है कि आखिर इतना पैसा खर्च होने के बाद भी यमुना अब तक जहरीली क्यों बनी हुई है।