
मथुरा/बरसाना। रसिक प्रवक्ता Shri Kanua Ji Maharaj ने कहा कि सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना गया है। यह मास भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिव्य समय होता है, जिसमें भक्ति, जप, तप, दान-पुण्य, सत्संग और आत्मशुद्धि का विशेष महत्व बताया गया है।
उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि के प्रमुख तीर्थ स्थल Govardhan, Barsana, Vrindavan और Mathura में पुरुषोत्तम मास के दौरान श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है। विशेष रूप से बरसाना धाम में श्रीजी महारानी के दर्शन, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु राधारानी एवं ठाकुरजी की भक्ति में लीन होकर इस पावन मास का लाभ प्राप्त करते हैं।
श्री कनुआ जी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक जागरण, मन की शुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का श्रेष्ठ अवसर भी है। इस अवधि में श्रद्धालुओं को प्रभु नाम-स्मरण, कथा श्रवण, मंदिर दर्शन, सेवा-भाव और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में किए गए दान, भजन-कीर्तन, व्रत, पूजा-पाठ और परोपकार के कार्य विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को इस दिव्य मास का लाभ लेकर अपने जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की ओर अग्रसर करना चाहिए।